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42 साल बाद हाईकोर्ट ने दी आदिवासियों को राहत, जमीन की नीलामी रद्द

प्रतिकात्मक तस्वीर

प्रतिकात्मक तस्वीर

42 साल पहले कलेक्टर की अनुमति के बगैर आदिवासी की जमीन को नीलाम करने के मामले में सुनवाई के बाद बिलासपुर हाई कोर्ट ने नीलामी को रद्द कर दिया है.

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42 साल पहले कलेक्टर की अनुमति के बगैर आदिवासी की जमीन को नीलाम करने के मामले में सुनवाई के बाद बिलासपुर हाई कोर्ट ने नीलामी को रद्द कर दिया है. साथ ही कोर्ट ने कहा कि अधिसूचित आदिम जनजातियों को विकास करने का अधिकार है. संपत्ति में उनका अधिकार अंतरण योग्य नहीं है. कोर्ट ने सभी पक्षों के बयान सुनने के बाद अपना फैसला दिया है.

बता दें कि सहकारी समिति से लिए गए लोन की वसूली के लिए आदिवासी की जमीन 42 साल पहले नीलम कर दी गई थी. 3100 रुपये की वसूली के लिए कलेक्टर की अनुमति के बगैर जमीन नीलम करने को सिविल कोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन मामला खारिज कर दिया गया था. इसके बाद मामला को लेकर फस्ट अपील और अन्य अपील कोर्ट में अपील की गई.

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अन्ततः मामला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पहुंचा. 42 साल पहले दायर याचिका में याचिकाकर्ता और पक्षकार दोनों की मृत्यु हो जाने के बाद मामला लंबित था और अब उनके वंशजों ने मामले को हाई कोर्ट में आगे बढ़ाया. हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने आदिवासी की जमीन नीलाम करने के मामले को ही रद्द कर दिया है.

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