होम /न्यूज /छत्तीसगढ़ /छत्तीसगढ़ ह ललित सुरजन के रूप म अपन एक सपूत ल गंवा दिस

छत्तीसगढ़ ह ललित सुरजन के रूप म अपन एक सपूत ल गंवा दिस

ललितजी ह संवेदनशीलता ल पत्रकार के एक अनिवार्य गुन मानत रिहिस

ललितजी ह संवेदनशीलता ल पत्रकार के एक अनिवार्य गुन मानत रिहिस

प्रगतिशील विचारक, लेखक, कवि अउ पत्रकार ललित सुरजनजी के निधन के सूचना हर अचरज म डार दिस. आज छत्तीसगढ़ ह अपन एक झन सपूत गं ...अधिक पढ़ें

देशबन्धु के प्रधान संपादक ललित सुरजन के निधन की खबर से मैं चौंक गया. मन बड़ा दुखी हुआ. उनका व्यक्तित्व बहुआयामी था. एक वरिष्ठ संपादक, पत्रकार, लेखक, कवि, सामाजिक, राजनीतिक चिंतक और मानवीय सरोकारों से सीधे जुड़े बेहतर इंसान थे. उनकी मानवीय संवेदनाएँ उन्हें खोजी पत्रकार की द्रष्टि के साथ धरातल की पत्रकारिता से जोड़े रखती थी. पिता स्व.मायाराम सुरजन के संपादकीय कार्यकाल से लेकर स्व.ललित सुरजनजी के कार्यकाल तक देशबन्धु एक सम्पूर्ण बौद्धिक अख़बार के सुयश का भागी है. अपने सिद्धांतो से कोई समझौता न करते हुए उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में नवीन प्रयोग किए और अख़बार में नित-नवीनता बनाए रखा. ललितजी के इस पैतृक संस्कार ने गांवों को ग्रामीण-पत्रकारिता से जोड़ा. इससे देशबन्धु की लोकप्रियता निरंतर बढ़ती रही.
ये भी पढ़ें : छत्तीसगढ़ी विशेष- छत्तीसगढ़ म लोकाचार पीढी दर पीढी व्यवहार म घूरे-मिले दिखथे



प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल के श्रद्धांजलि
हमर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेलजी बड़ मार्मिक बात कहि के ओखर योगदान के सुरता करे हे अउ अपन श्रद्धांजलि दे हे-‘प्रगतिशील विचारक, लेखक, कवि अउ पत्रकार ललित सुरजनजी के निधन के सूचना हर अचरज म डार दिस. आज छत्तीसगढ़ ह अपन एक झन सपूत गंवा डरिस. साम्प्रदायिकता अउ रूढ़िवादिता के खिलाफ देशबन्धु के माध्यम से जों लौ मायाराम सुरजन जी ह जलाय रिहिस ओला ललित भैया ह बखूबी आघू बढ़इस’.

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के श्रद्धांजलि
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अउ प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह घलो बड़ भावुक होके श्रद्धांजलि दिस ‘वरिष्ठ पत्रकार ललित सुरजनजी के असामयिक निधन के समाचार बड़ दु;खद हे. ओखर जाना छत्तीसगढ़ अउ देश के पत्रकारिता बर अपूरणीय क्षति हे. सुरजनजी हमेशा अपन सिद्धांत म अडिग रिहिस. अपन पूरा जीवन भर आम-जन के आवाज उठावत रिहिस ओखर योगदान ल हमेशा सुरता करे जही’.

सुरता ललित भैया के
जब छत्तीसगढ़ ह म.प्र.राज्य म रिहिस तब म.प्र. साहित्य परिषद भोपाल व्दारा गजानन माधव मुक्तिबोध अउ डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के सुरता म दु दिन के सरकारी साहित्यिक कार्यक्रम राजनंदगांव म होय. प्रदेश अउ देश भर के बड़े बड़े साहित्यकार अउ इहाँ के साहित्यकार मन घलो ओ कार्यक्रम म भाग लेंय. प्राय: सबे आयोजन म रायपुर ले ललित सुरजनजी भाग लेय. रचना के विविध आयाम म सार्थक समीक्षा अउ रचना गोष्ठी होय. हर साल ये कार्यक्रम होय. एहा ओ दिन के बात आय जब प्रगतिशील लेखक संघ ललित सुरजन से ऊरजा पा के बहुत सक्रिय रिहिस. बकायदा हर शहर म विचार गोष्ठी, कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक के समीक्षा आदि होय. रचना शिविर लगे. हर विधा के लेखन म सक्रियता के लहर चले. पाठक मंच म नवा किताब के समीक्षा अउ समीक्षा उपर प्रतिक्रिया होय. लेखक, कवि मन ल समीक्षा के प्रति भेजे जाय. सुविख्यात व्यंग्यकार स्व.हरिशंकर परसांई के प्रेरना ले छत्तीसगढ़ म प्रगतिशील लेखक संघ के गठन अउ ललित सुरजन के प्रयास ले पूरा छत्तीसगढ़ म प्रलेस के बइठ्का होय. हर लेखक कवि के रचना उपर लोगन अपन प्रतिक्रिया परगट करें. प्रदेश म अर्जुन सिंह के सरकार रिहिस त ये सब गतिविधि होवत रिहिस.

राज्य स्तरीय कवि सम्मेलन
सुविख्यात कवि नारायणलाल परमार के 72 वां जनम दिन म मुजगहन(धमतरी) म प्रांतीय कवि सम्मेलन होइस त वुहाँ मुख्य अतिथि ललित सुरजन रिहिस. जिहां महूं आमंत्रित रेहेंव. धमतरी के कवि मन घलो रिहिन. सुंदर काव्य-पाठ होइस. ललितजी अपन विचार व्यक्त करिस. ओमा मोरो उल्लेख होइस.

एक दिन की बात
देशबन्धु अखबार ले मोर जुड़ाव बचपन ले रिहिस. स्कूल के दिन म बाल कविता, कहानी प्राय;छपते राहाय यही सन-1972 से 75 तक. ललिता दीदी ओ पेज ल संवारे. न मोर कोनो जान रिहिस ना पहिचान. डाक से प्रमान-पत्र घलो मिलिस. चालीस-बयालीस साल पहिली अखबार म बाल-साहित्य बर अखबार म जघा राहय. देशबन्धु म रोज आदरणीय रामाश्रय उपाध्यायजी के ‘१ दिन की बात’ कालम छपे जोंन बड़ा प्रभावित करे. बाद म मोर अकन कविता-लेख, मोर भेजे समाचार छपे. एखर बर कोनो जान पहिचान के होना जरूरी नई रिहिस. एक दौर अइसनो रिहिस जब रविवारीय अंक के कलेवर बहुत शानदार आना शुरू होइस. रायपुर ले जोंन गिने चुने अखबार राजनंदगांव आय ओमा पूरा-पूरा अंक साहित्य के कलेवर से भरे राहय. देशबन्धु के अपन पहिचान रिहिस. मोर बहुत अकन कविता छपिस. इहाँ रोज इतवार के साहित्यिक गोष्ठी हो जाय.

बहुआयामी कार्य
ललितजी ल बचपन ले साहित्य के संस्कार मिलिस. किताब पढ़ना, घूमना अउ लिखना म ओला आनंद आय. अनेक किताब लिखिस. पत्रकारिता सामाजिक सरोकार ले जुड़े रिहिस. मायाराम सुरजन फाउंडेशन, रोटरी क्लब, साक्षरता, नदी बचाव आन्दोलन आदि के माध्यम से घलो सामाज-सेवा करिस. ख़ास बात त यहू हे के जल संरक्षण बर महानदी, खारून के उदगम से अंत तक कई बखत पैदल यात्रा करिस. रतिहा नदिया के तीर म बसे लोगन से बातचीत करके पानी के प्रति जागरण के आव्हान करिस. शिवनाथ नदी के निजीकरण के विरोध करिस. विश्व शान्ति बर देश-विदेश के यात्रा करिस. प्रगतिशील लेखक संघ के साहित्यिक गतिविधि ल बढ़े खातिर ललितजी अउ संवारी मन के प्रयास बड़ सार्थक रिहिस. कवि मन के सुघ्घर टीम बनिस जेन राज्य अउ राष्ट्र्रीय स्तर तक चेतना के मशाल जइंन. छत्तीसगढ़ म साहित्यिक गतिविधि बहुत बाढ़ीस. ललितजी मुंशी प्रेमचंद, सुदर्शन, सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसांई आदि के विचारधारा अउ परिवार के संस्कार से जादा प्रभावित रिहिस. रोज छै घंटा किताब पढ़े. देशबन्धु ल एक पूरा अखबार बनाय के स्पष्ट सोच अख़बार म दिखतथे. नवा पत्रकार मन ल ए दिशा म मांजे बर ललित जी के सार्थक मार्गदर्शन हमेशा रिहिस. खोजी पत्रकारिता और जन-सामान्य के समस्या ल उठाय बर ओखर प्रेरना सदा रिहिस. ललितजी आप मन हमेशा सुरता आहु. मोर श्रद्धांजलि.

Tags: Articles in Chhattisgarhi, Chhattisgarh New, Lalit surjan Deshbandhu

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें