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कोल ब्‍लॉक नीलामी: जिंदल और बाल्‍को को झटका, दोनों की बोली खारिज

कोल ब्‍लॉक नीलामी: जिंदल और बाल्‍को को झटका, दोनों की बोली खारिज

हाल ही में छत्तीसगढ़ तीन कोल ब्लाकों की नीलामी की गई थी, जिसमें इंटर मिनिस्ट्रिलय ग्रुप ने कार्टेलाइजेशन होने का संदेह जाहिर किया था। जिसके बाद शनिवार को केंद्र सरकार ने बाल्को को जिंदल के नाम पर आवंटित कोल ब्लॉक गारे पल्मा 4/1, 4/2-3, तारा ब्लाक की नीलामी रद्द कर दी।

हाल ही में छत्तीसगढ़ तीन कोल ब्लाकों की नीलामी की गई थी, जिसमें इंटर मिनिस्ट्रिलय ग्रुप ने कार्टेलाइजेशन होने का संदेह जाहिर किया था। जिसके बाद शनिवार को केंद्र सरकार ने बाल्को को जिंदल के नाम पर आवंटित कोल ब्लॉक गारे पल्मा 4/1, 4/2-3, तारा ब्लाक की नीलामी रद्द कर दी।

हाल ही में छत्तीसगढ़ तीन कोल ब्लाकों की नीलामी की गई थी, जिसमें इंटर मिनिस्ट्रिलय ग्रुप ने कार्टेलाइजेशन होने का संदेह जाहिर किया था। जिसके बाद शनिवार को केंद्र सरकार ने बाल्को को जिंदल के नाम पर आवंटित कोल ब्लॉक गारे पल्मा 4/1, 4/2-3, तारा ब्लाक की नीलामी रद्द कर दी।

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  • News18
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    हाल ही में छत्तीसगढ़ तीन कोल ब्लाकों की नीलामी की गई थी, जिसमें इंटर मिनिस्ट्रिलय ग्रुप ने कार्टेलाइजेशन होने का संदेह जाहिर किया था। जिसके बाद शनिवार को केंद्र सरकार ने बाल्को को जिंदल के नाम पर आवंटित कोल ब्लॉक गारे पल्मा 4/1, 4/2-3, तारा ब्लाक की नीलामी रद्द कर दी।

    दरअसल, एक जैसे कोल ब्लॉक पर सवाल उठे थे। बाल्को और जिंदल को यह कोल ब्लॉक नीलामी की न्यूनतम कीमत से कुछ ही ऊपर मिले थे। बाल्को एंव जिंदल ने इसके लिए सर्वाधिक बोली लगाई थी। गारे पल्मा 4/1 बाल्को को मिली थी, जबकी गारे पल्मा 4/2-3, और तारा ब्लाक जिंदल को गए थे।

    इसके संदर्भ में तभी न्यूज18 ने गोल्डेन ग्रीन आवॉर्ड से नवाजे गए। एक्टिविस्ट रमेश अग्रवाल के हवाले से भी खबर उठाई थी कि जितने कम में बाल्को एवं जिंदल को कोयला खदानें मिली है। वह अपने आप में कई सवाल खड़े करते हैं, चूंकि नियमों के हवाले से इन लोगों ने सर्वाधिक बोली लगाई थी।

    प्रकाश इंडस्ट्रीज और जायसवाल नीको इन नीलामीयों के एक प्रकार से बाहर ही था इसलिए बाल सरकारी पाले में था। केंद्र सरकरा के इंटरमिनिस्ट्रियल मीटिंग में उस समय हुए आठ कोल ब्लॉकों की नीलामी के फिर से जांच दिए थे। जांच रिपोर्ट जब पेश की गई तो ये तीन कोल ब्लॉक संदेह के दायरे से बाहर नहीं आ सके और केंद्र सरकार ने नीलामी को रद्द कर दिया।

    अब इन कोल ब्लाकों की फिर से नीलामी की जाएगी और नीलामी नहीं की गई तो ये कोल इंडिया को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे। जिंदल ने इस पर असंतोष जाहिर करते हुए इसे दुर्भाग्य पूर्ण करार दिया है। जिंदल कंपनी के मुताबिक नीलामी प्रक्रिया यूं हि बढ़ते रहती तो जनता और सरकार को कम से कम 58,572 करोड़ रुपए का फायदा होता।

    वहीं, बाल्को प्रबंधन का कहना है कि वे नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने के प्रति वचनबद्ध हैं और उनकी कंपनी द्वारा किसी भी प्रकार के कार्टेलाइजेशन प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया था। अधिकारियों से सांठ-गांठ की खबर महज एक अफवाह है और कुछ भी नहीं।

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