COVID-19: छत्तीसगढ़ की सीमा पर फंसे महासमुंद के 18 तीर्थ यात्री, शासन ने सीमा प्रवेश करने की नहीं दी अनुमति

पुल के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं ये 18 श्रद्धालु.
पुल के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं ये 18 श्रद्धालु.

अपर कलेक्टर मोहम्मद शरीफ (Additional Collector Mohammad Sharif) ने बताया कि मामले की जानकारी शासन को दी गई है. शासन से अभी तक किसी भी प्रकार की अनुमति उन्हें लाने की नहीं मिली है.

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महासमुंद: लॉक डाउन (Lock Down) में फंसे महासमुंद के 18 तीर्थ यात्री छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की सीमा पर तो पहुंच गए, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार (Chhattisgarh Government) से प्रवेश की अनुमति नहीं मिलने के कारण सीमा पर ही रहने को मजबूर है. दरअसल, महासमुंद के नांदगांव के 18 लोग तिरूपति बालाजी (Tirupati Balaji) दर्शन करने गए थे जो लॉक डाउन होने के बाद वहीं फंस गए थे. सांसद चुन्नीलाल साहू ने इन लोगों को वापस लाने के लिए आंध्रप्रदेश और ओडिशा के प्रशासन से मदद मांगी. किसी तरह इनको सड़क के रास्ते छत्तीसगढ़ की सीमा तक लाया गया.

शासन ने नहीं दी छत्‍तीसगढ़ में प्रवेश की इजाजत
ये सभी लोग छत्‍तीसगढ़ की सीमा तक आने में तो सफल हो गए, लेकिन शासन ने इनको प्रदेश में दाखिल होने की इजाजत नहीं दी. फिलहाल सभी को ओडिशा सीमा पर स्थित जोंक नदी के किनारे टेमरी गांव में काली मंदिर के धर्मशाला में रखा गया है. आपको बता दें कि कोरोना वायरस के कारण ट्रेन, बस सेवाएं रद्द होने के कारण महासमुंद जिले के नांदगांव पंचायत के 18 लोग तिरूपति में फंस गए थे. उनकी घर वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए ग्राम पंचायत ने कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई थी. गुहार लगाते हुए ग्रामीणों ने कहा था कि 12 मार्च को नांदगांव से तिरूपति बालाजी मंदिर दर्शन करने गए कुल 18 श्रद्धालु तिरुपति में रुके हैं, जिनका ट्रेन रिजर्वेशन घर वापसी के लिए 22 मार्च को निर्धारित था. लेकिन, ट्रेन एवं बस रद्द रद होने के कारण वे वहां फंस गए.

घर वापसी की अनुमति का है श्रद्धालुओं को इंतजार
जानकारी के अनुसार इन श्रद्धालुओं को घर वापसी को लेकर महासमुंद सांसद चुन्नीलाल लगातार प्रयास कर रहे थे. किसी तरह से शुक्रवार रात करीब 2 बजे सभी 18 तीर्थयात्रियों आंध्रप्रदेश ओडिशा होते हुए छत्तीसगढ़ सीमा खरियार रोड और छत्तीसगढ़ सीमा पर लाया गया. जहां शासन से आने की अनुमति नहीं होने के कारण जोंक नदी के पुल के नीचे सभी ने करीब 19 घंटा बिताया. यहां आसपास के स्थानीय जनप्रतिधियों द्वारा इन श्रद्धालुओं का भोजन व्यवस्था किया गया है. जहां पर सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखते हुए सभी को बिठाया गया था. अभी तक यह स्‍पष्‍ट नहीं है कि इनकी घर वापसी कब तक संभव होगी.



स्‍वास्‍थ्‍य परीक्षण के बाद ही मिलेगी घर वापसी की इजाजत
कोमाखान थाना प्रभारी शरद ताम्रकार ने बताया कि इन श्रद्धालुओं के देखरेख में खरियार रोड नगर के सेवाभावी, पटपरपाली सरपंच, कोमाखान सरपंच और स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ कोमाखान पुलिस द्वारा खाने पीने की सामग्री उपलब्ध कराई गई है. रात होने पर नदी किनारे स्थित काली मंदिर के धर्मशाला में सभी को रखा गया है. शासन से अनुमति मिलने के बाद ही आगे आदेशानुसार कार्रवाई की जाएगी. अपर कलेक्टर मोहम्मद शरीफ ने बताया कि मामले की जानकारी शासन को दी गई है. लेकिन शासन से अभी तक किसी भी प्रकार की अनुमति उन्हें लाने की नहीं मिली है. शासन से अनुमति मिलने के बाद ही सभी का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा और टेस्ट कराने के बाद ही उन्हें घर लाया जायेगा.

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