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पूर्व सीएम अजीत जोगी ने कहा- अपने जन-जंगल-जमीन पर आदिवासियों का ही अधिकार

हजारों की संख्या में ग्रामीण आंदोलन के दूसरे दिन भी एनएमडीसी का घेराव कर रहे है.

हजारों की संख्या में ग्रामीण आंदोलन के दूसरे दिन भी एनएमडीसी का घेराव कर रहे है.

बता दें कि हजारों की संख्या में ग्रामीण आंदोलन के दूसरे दिन भी एनएमडीसी का घेराव कर रहे है.

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    छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला के डिपॉजिट 13 में उत्खनन के विरोध में दूसरे दिन भी ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन जारी है. बता दें कि शनिवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी भी धरना स्थल पहुंचे. जेसीसीजे सुप्रीमो अजीत जोगी ने कहा कि ग्रामीणों की जन-जंगल-जमीन की मांग वाजिब है. इस पर ग्रामीणों का अधिकार है और वो ही रहेगा. मिली जानकारी के मुताबिक मजदूर कर्मचारी संगठन ने भी आदिवासियों के इस आंदोलन को समर्थन देने का मन बना लिया है. जल्दी ही मजदूर संगठन के पदाधिकारी धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों को अपना समर्थन दे सकते है. मालूम हो कि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों ने खदान विरोधी संघर्ष छेड़ दिया है. दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला पर्वत श्रृंखला के नंदाराज पहाड़ पर स्थित एनएमडीसी के 13 नंबर की लोह अस्यक खदान को अडानी की कंपनी को दिए जाने का आदिवासी विरोध कर रहे हैं. बता दें कि हजारों की संख्या में ग्रामीण आंदोलन के दूसरे दिन भी एनएमडीसी का घेराव कर रहे है. संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति ये प्रदर्शन कर रही है.

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    दंतेवाड़ा में आदिवासियों के आंदोलन में शामिल होने पूर्व सीएम अजीत जोगी भी पहुंचे.


    ये है पूरा मामला

    दरअसल दंतेवाड़ा के बैलाडीला पर्वत श्रृंखला के नंदाराज पहाड़ पर स्थित एनएमडीसी की डिपॉजिट-13 नंबर खदान को अडानी की कंपनी को दिए जाने के बाद होने वाले खनन का विरोध आदिवासियों ने शुरू कर दिया है. नंदाराज पहाड़ को बचाने के लिए सर्व ग्राम पंचायत ने आंदोलन की तैयारी की है. जन संघर्ष समिति के बैनर तले आदिवासी एनएमडीसी का घेराव कर रहे है. डिपॉजिट 13 के निजीकरण का शुरू से विरोध कर रहे ट्रेड यूनियन भी आंदोलन के समर्थन में हैं. मिली जानकारी के मुताबिक अडानी ग्रुप ने सितंबर 2018 को बैलाडीला आयरन ओर माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड यानी बीआईओएमपीएल नाम की कंपनी बनाई और दिसंबर 2018 को केन्द्र सरकार ने इस कंपनी को बैलाडीला में खनन के लिए 25 साल के लिए लीज दे दी. बैलाडीला के डिपॉजिट 13 में 315.813 हेक्टेयर रकबे में लौह अयस्क खनन के लिए वन विभाग ने वर्ष 2015 में पर्यावरण क्लियरेंस दिया है. जिस पर एनएमडीसी और राज्य सरकार की सीएमडीसी को संयुक्त रूप से उत्खनन करना था. लेकिन बाद में इसे निजी कंपनी अडानी इंटरप्राइजेस लिमिटेड को 25 साल के लिए लीज हस्तांतरित कर दिया गया.

     

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