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बस्तर के बड़े राजनीतिक घराने के इस 'लाल' को मनाना कांग्रेस के लिए चुनौती

Abdul Hameed Siddique | News18 Chhattisgarh
Updated: November 5, 2018, 1:17 PM IST

कांग्रेस से टिकट की मांग कर रहे छबिन्द्र ने गुरुवार की दोपहर को अपने समर्थकों के साथ दंतेवाड़ा विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया.

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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के शुरुआती दौर में ही कांग्रेस को अपनों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. कांग्रेस ने बीते गुरुवार की शाम को उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी. सूची जारी होने से पहले ही बस्तर कांग्रेस के सबसे बड़े राजनीतिक घराने में फूट नजर आई. बस्तर टाइगर महेन्द्र कर्मा के बेटे छबिन्द्र कर्मा अपनी मां देवती कर्मा के खिलाफ चुनाव लड़ने मैदान में उतर गए.

ये रहा छबिन्द्र कर्मा  का राजनीतिक सफर

कांग्रेस से टिकट की मांग कर रहे छबिन्द्र ने गुरुवार की दोपहर को अपने समर्थकों के साथ दंतेवाड़ा विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया. इसके बाद से मां-बेटे के बीच राजनीतिक मतभेद की खुलकर चर्चा है. दंतेवाड़ा विधानसभा सीट कर्मा परिवार की पारंपरिक सीट मानी जाती है. साल 2008 के चुनाव में महेन्द्र कर्मा को हार का सामना जरूर करना पड़ा था, लेकिन इसके पहले के तीन चुनावों में महेन्द्र कर्मा को लगातार जीत मिली थी. कांग्रेस ने दंतेवाड़ा सीट से वर्तमान विधायक देवती कर्मा को फिर से प्रत्याशी बनाया है. छबिन्द्र का कहना है कि उन्होंने चुनाव लड़ने का मूड बना लिया है. वे टिकट नहीं मिली है तो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे.

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ऐसा नहीं है कि कांग्रेस की ओर से छबिन्द्र को मनाने की कोशिश नहीं की गई. छबिन्द्र द्वारा नामांकन फार्म खरीदे जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल और उपनेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा उनसे मिलने पहुंचे. भूपेश बघेल व बस्तर कांग्रेस के अन्य बड़े नेताओं ने छबिन्द्र को मनाने की कोशिश भी की, लेकिन उसके बाद भी छबिन्द्र कर्मा ने नामांकन दाखिल कर दिया है. हालांकि पहले चरण के चुनाव में नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 26 अक्टूबर है.

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल कह चुके हैं कि छबिन्द्र को समय रहते मना लिया जाएगा. शुक्रवार को दिल्ली से रायपुर पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा ने कहा कि छविंद्र कर्मा को हमलोग मनाने की कोशिश करेंगे. हम समझाइश ही दे सकते हैं. छविंद्र कर्मा ने मीडिया से बातचीत में पहले ही साफ कर दिया है कि वे निर्दलीय नामांकन दाखिल कर चुके हैं. कांग्रेस पार्टी अगर प्रत्यासी बनाती है तो अब भी वो कांग्रेस से लड़ेंगे और नहीं बनाएगी तो निर्दलीय चुनाव लड़ना तय है.

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दंतेवाड़ा के वरिष्ठ पत्रकार यशवंत यादव का कहना है कि परिवार में राजनीतिक बगावत कोई नई बात नहीं है. उत्तर प्रदेश का समाजवादी घराना भी विवादों में रहा. यहां अखिलेश यादव के पिता नेता मुलायम सिंह खासा विरोध करते देखे गए थे. बस्तर में कांग्रेस के सबसे बड़े राजनैतिक घराने में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है. ऐसे में यदि समय रहते छबिन्द्र कर्मा को कांग्रेस नहीं मना पाती है तो उसका नुकसान उसे चुनाव में उठाना पड़ सकता है. हालांकि साल 2013 के चुनाव में देवती कर्मा 5 हजार 987 मतों से जीत मिली थी, लेकिन पांच साल में हालात बदले हैं. सीटिंग एमएलए होने के नाते उन्हें एंटी इनकम्बेंसी का सामना करना पड़ सकता है.

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First published: October 19, 2018, 12:03 PM IST
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