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बगैर शौचालय बनाए ही गांवों को ओडिएफ घोषित कर रहे हैं अफसर, टूट जाएगा PM मोदी का सपना!

गांवों को शौचमुक्त बनाने के लिए अधिकारियों को इतनी जल्दी है कि बगैर शौचालय निर्माण के ही गांवों को ओडीएफ घोषित करवा दे रहे हैं.

गांवों को शौचमुक्त बनाने के लिए अधिकारियों को इतनी जल्दी है कि बगैर शौचालय निर्माण के ही गांवों को ओडीएफ घोषित करवा दे रहे हैं.

दंतेवाड़ा के मेटापाल पंचायत में अधूरे शौचालय को लेकर नाराज ग्रामीणों ने मंगलवार को कलेक्टर से मुलाकात कर आवेदन सौंपा.

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गांवों को शौचमुक्त बनाने के लिए अधिकारियों को इतनी जल्दी है कि बगैर शौचालय निर्माण के ही गांवों को ओडीएफ घोषित करवा दे रहे हैं. इसकी बानगी छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के मेटापाल ग्राम में देखने को मिली, जहां अफसरों ने सरपंचों के साथ शौचमुक्त पंचायत का बोर्ड लगाकर फीता भी काट दिया. जबकि इस गांव में करीब 90 प्रतिशत घरों में अभी भी शौचालय नहीं है, लेकिन शौचालय निर्माण की राशि पूरी निकाल ली गई है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के संकल्प को लेकर ग्रामीण भी अब जागरूक हो रहे हैं और शौचालय निर्माण न करवाने पर 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों का बहिष्कार करने का आवेदन कलेक्टर को सौप कर आक्रोश जता रहे हैं. शौचालय निर्माण में गड़बड़ी का हवाला देकर स्वतंत्रता दिवस का बहिष्कार करने की बात ग्रामीण कर रहे हैं.

कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
दंतेवाड़ा के मेटापाल पंचायत में अधूरे शौचालय को लेकर नाराज ग्रामीणों ने मंगलवार को कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा से मुलाकात कर आवेदन सौंपा और शौचालय में गड़बड़ी करने वाले संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की. कलेक्टर ने जिला पंचायत सीईओ को पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. ग्रामीणों ने दोषियों पर कार्रवाई नहीं होने पर स्वाधीनता पर्व 15 अगस्त के बहिष्कार की चेतावनी भी दी है.

बड़ी गड़बड़ी की आशंका
पूर्व सरपंच बिज्जो के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण आज कलेक्ट्रेट पहुंचे. ग्रामीणों ने बताया कि 5000 की आबादी वाले मेटापाल पंचायत में दो ढाई सौ शौचालय बनाए गए हैं, वो शौचालय भी अधूरे हैं. जबकि 1000 शौचालय निर्माण की पूरी राशि निकाल ली गई है. शौचालय के अभाव में ग्रामीणों को काफी परेशानी हो रही है. शौच के लिए जंगलो औए खेतो का सहारा लिया जा रहा है. पहले भी इस गड़बड़ी की शिकायत मुख्यमंत्री के जनदर्शन में की गई है. प्रभारी मंत्री से भी शिकायत हुई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.

जांच के निर्देश
कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने बताया कि ग्रामीणों को शिकायत पत्र पर जांच के लिए सीईओ जिला पंचायत को निर्देश दिए गए हैं. जांच प्रतिवेदन के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी. मेटापाल निवासी उत्तम मरकाम ने बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद गांवों में स्वच्छ भारत की तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है. प्रधानमंत्री का खुले में शौच मुक्त किए जाने का संकल्प और सपना टूट रहा है.

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