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दंतेवाड़ा में आस्था के पर्वत पर ग्रामीणों के शरीर में देवी का प्रवेश, बोलीं- नहीं काटने देंगे जंगल!
Dantewada News in Hindi

Abdul Hameed Siddique | News18 Chhattisgarh
Updated: February 11, 2020, 1:59 PM IST
दंतेवाड़ा में आस्था के पर्वत पर ग्रामीणों के शरीर में देवी का प्रवेश, बोलीं- नहीं काटने देंगे जंगल!
जल जंगल और जमीन की रक्षा के लिए एक बार फिर सर्व आदिवासी समाज 10 फरवरी को नंदराज पर्वत पर एकजुट हुआ.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के दंतेवाड़ा (Dantewada) में देवों के स्थल नंदराज पर्वत पर दर्जनों ग्रामीण झूमने लगे. बताया गया कि महिलाओं और पुरुषों के शरीर में देवी प्रवेश कर ली हैं.

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दंतेवाड़ा. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के दंतेवाड़ा (Dantewada) में देवों के स्थल नंदराज पर्वत पर दर्जनों ग्रामीण झूमने लगे. बताया गया कि महिलाओं और पुरुषों के शरीर में देवी प्रवेश कर ली हैं. देवी ने कहा- जंगल काटने देंगे, न पहाड़ खोदने देंगे. मौका था भूमकाल दिवस का जब हजारों आदिवासी (Tribals) नंदराज पर्वत के पिटोडमेटा पहुंचे थे. बताया जाता है कि नंदराज बाबा की धर्मपत्नी पिटोडमेटा हैं. कहते है इस पहाड़ पर एक दो नही बल्कि कई सारे देव का स्थल हैं.

जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए एक बार फिर सर्व आदिवासी समाज 10 फरवरी को नंदराज पर्वत पर एकजुट हुआ. इस दौरान यहां आदिवासी समाज के लोगों ने पूजा अर्चना कर देवी से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने की कामना की. इसी दौरान देखा गया कि यहां आये पुरुष और कई महिलाओं को ‘देवी’ आ गई और वे झूमने लगीं. कोई लेटकर पहाड़ों पर खुद को घसीटता रहा तो कोई पथरीले जमीन पर नंगे पांव कूदने लगा. कोई लोहे की नुकीले सलाखों से खुद पर वार करने लगा. यहां तक कि एक ग्रामीण पर देवी आने के बाद लोग उससे सवाल जवाब तक करते दिखे. यह देख हर कोई आश्चर्य चकित था.

नाराज है नंदराज बाबा
ग्रामीणों पर देवी आने को लेकर यहां के पुजारियों का कहना है कि पहाड़ की खुदाई से देवी और नंदराज बाबा नाराज हैं और उन्होंने कहा है कि न जंगल कटेगा और न ही पहाड़ खोदने देंगे. पुजारी बुधराम मंडावी का कहना है कि आस्था के इस नंदराज पर्वत पर उच्च क्वालिटी की लौह अयस्क खदान है. एनएमडीसी किरंदुल की लौह अयस्क खदान नम्बर 13 को निजी हाथों में सौप दिया गया था, जिसके विरोध में सर्व आदिवासी समाज ने अनिश्चित कालीन आंदोलन भी किया था. सर्व आदिवासी समाज ने तब फैसला लिया कि भूमकाल दिवस यही मनाया जाएगा. पुजारी बुधराम मंडावी ने बताया की हमारी लड़ाई जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए है. इसलिए हम यहां एकजुट हुए हैं. देवी ने यहां महिलाओं के शरीर मे प्रवेश कर बताया कि न तो जंगल काटने देंगे और न ही पहाड़ खोदने देंगे. पहाड़ खोदने की योजना से भगवान नाराज हैं.

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First published: February 11, 2020, 1:59 PM IST
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