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डॉक्टर्स डे स्पेशल: बस्तर के 'लाल गलियारों' में सेवा दे रहे ये डॉक्टर, नक्सल रडार पर है पूरी फैमिली

डॉक्टर्स डे स्पेशल: बस्तर के 'लाल गलियारों' में सेवा दे रहे ये डॉक्टर, नक्सल रडार पर है पूरी फैमिली

मरीज का इलाज करते डॉ. विजय कर्मा.

मरीज का इलाज करते डॉ. विजय कर्मा.

Doctor's Day: छत्तीसगढ़ के घोर नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में डॉ. विजय कर्मा 20 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं. राजनीति परिवार से होने के कारण वे नक्सलियों की रडार पर रहते हैं.

दंतेवाड़ा. दंतेश्वरी की पावन धरा बस्तर के दंतेवाड़ा की प्रसिद्धि देश ही नहीं, देश के बाहर भी है. इसके बाद कोई दूसरी तस्वीर यहां सामने आती है तो वो लाल आतंक है. नक्सल हिंसा की डरवानी तस्वीरें लोगों की जहन में आती हैं. यहां लोगों ने कई बार शवों के खलियान बनते देखे हैं. लहूलुहान लोग और जख्मों का तो कोई हिसाब ही नहीं है. इसी दंतेवाड़ा में एक परिवार का नाम राजनैतिक गलियारों में बड़े आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है, वो है कर्मा परिवार. दंतेवाड़ा के फरसपाल वाला कर्मा परिवार.

प्रदेश के नेता पतिपक्ष रहे महेंद्र कर्मा के बलिदान को भला कौन भूल सकता है? इसी परिवार से है डॉ. विजय कर्मा. विजय कर्मा बस्तर टाईगर महेंद्र कर्मा के चचेरे भाई हैं और एमएलए और एमपी रहे लक्ष्मण कर्मा के छोटे भाई हैं. इन्होंने भी अपनी जन्म भूमि को ही कर्मभूमि माना. एमडी मडिसिन करने के बाद दंतेवाड़ा को ही सेवा क्षेत्र के रूप में चुना. यह जानते हुए भी कि लाल आतंक के बीच सेवा एक बड़ी चुनौती बन सकती है. पूरा परिवार लाल आतंक की रडार पर रहता है. इतना सब कुछ जानते हुए भी 10 साल लगभग अंदरूनी इलाके कुआकोंडा में सेवाएं दी. वे कहते हैं बड़ा कठिन दौर था आर्थिक तंगी भी बाधा रही.

पढ़ता रहा और बढ़ता रहा
विजय कर्मा कहते हैं- परिवार का नाम तो शुरू से ही बड़ा रहा है. परिवार के सदस्यों का प्रदेश की राजनीति में बड़ा हस्तक्षेप रहा है. बड़े भाई प्रदेश राजनीति के बड़े चहरे थे. इस बात को हर कोई जानता है. इसके बाद भी पढ़ाई अपने बलबूते पर की. पढ़ने में अच्छा था. गांव से आठवीं तक की पढ़ाई की. बिजली गांव में नहीं थी, पिता की मौत बहुत छोटा था उसी दौरान हो गई थी. आदिवासी परंपरा में पढ़ाई बड़ा महत्व नही रखती थी. मेरे ऊपर पढ़ाई का कोई दबाव नहीं था. मै पढ़ता रहा और आगे बढता गया. जब मै डॉक्टर बना तो उस दौरान मां को बेहद खुशी हुई कि मरे बेटा डॉक्टर बन गया. रायपुर से एमबीबीएस किया और भोपाल से एमडी मेडिसिन. इसके बाद सीधा दंतेवाड़ा सेवाएं देने के लिए आ गया. अपनी नौकरी के 20 साल लगभग पूरे करने वाला हूं.

अंदरूनी इलाकों में बड़ी चुनौती है
डॉ. विजय कर्मा बताते हैं कि ये वो क्षेत्र है, जहां स्वास्थ्य सेवा एक बड़ी चुनौती है. उस समय तो और कठिन थी जब वे यहां बतौर डॉक्टर पदस्थ हुए. अब स्थतियां सुधर रही हैं और बेहतरी की ओर दंतेवाड़ा है. अब इलाज आसान हो रहा है. लोगों को सुविधाएं मिल रही हैं. इसके बाद भी लगता है स्वास्थ्य के क्षेत्र में और बेहतर करने की जरूरत है. सरकार और प्रशासन इस कार्य को कर रहे हैं.  कारोना काल में सभी डॉक्टर और स्टॉफ मुस्तैद रहा.

आपके शहर से (दंतेवाड़ा)

Tags: Bastar news, Doctor's day, Doctor's Day Special

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