बस्‍तर में नक्सलियों से नहीं... मच्छरों से डर लगता है साहब!
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छत्तीसगढ़ में माओवादियों के गढ़ दक्षिण बस्तर में नक्सलियों को चुनौती देने वाले जवान इन दिनों मच्छरों से परेशान हैं.

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छत्तीसगढ़ में माओवादियों के गढ़ दक्षिण बस्तर में नक्सलियों को चुनौती देने वाले जवान इन दिनों मच्छरों से परेशान हैं. जंगलों में सर्चिंग पर निकले जवानों को जितना खतरा माओवादियों के एंबुश से रहता है, उससे कहीं ज्यादा खतरनाक मच्छर साबित हो रहे हैं. मच्छरों के काटने से 15 जनवरी को डीआरजी के एएसआई भीष्म की मौत हो गई थी. दो दर्जन से अधिक सीआरपीएफ़, एसटीएफ, डीआरजी एवं जिला पुलिस बल के जवान मलेरिया से पीड़ित हैं, जिनका इलाज दंतेवाड़ा जिले के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है.

सूत्रों के मुताबिक बीते 7 दिनों में जंगल से सर्चिंग कर लौटने के बाद कई जवानों को मलेरिया पॉजिटिव पाया गया है. अरनपुर-जगरगुंडा सड़क निर्माण के लिए नक्सली गढ़ के रूप में पहचाने जाने वाले जगरगुंडा क्षेत्र के कोंडा सावली में सीआरपीएफ़ की कम्पनी तैनात की गई है. नक्सल प्रभाव वाले इस क्षेत्र में सीआरपीएफ़ की कम्पनी स्थापित करने के लिए 500 से अधिक जवानो को जंगलो में सर्चिंग पर भेजा गया था.

एक हफ्ते की सर्चिंग के बाद जब जवान वापस लौटे तो दो दर्जन से अधिक जवानों में मलेरिया पॉजिटिव पाया गया.
जंगलो में एक हफ्ते की सर्चिंग के दरमियान जवानों के लिए उचित प्रबंध नहीं थे. बताते हैं कि सर्चिंग के दौरान पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण जवानों को गंदे नालों का दूषित पानी पीना पड़ा.



डीआरजी रघुराज व चन्द्रशेखर ने बताया कि वो बीमार होते हैं तो उनके स्वास्थ्य परीक्षण के लिए हॉस्पिटल ही आना पड़ता है.
उनके लिए कैम्प में कोई डॉक्टरी सुविधा मुहैया नहीं करवाई जाती है. 5 दिनों तक जंगलों से सर्चिंग कर लौटने के बाद कई जवान मलेरिया के शिकार हो गए हैं.



बस्तर के दूरस्थ अंचलों में नक्सलियों से मोर्चा ले रहे एसटीएफ़ के जवानों ने जिला अस्पताल में इलाज के दौरान लाइन में लगकर इलाज करवाने पर किसी भी जांच के लिए 2 से 3 दिनों तक के समय लगने की बात कही. उनके मुताबिक दूरस्थ छेत्रो से बीमारी की हालत में पहुंचते है फिर भी इलाज के लिए 3 दिनों तक अस्पताल के चक्कर लगाना पड़ता है. जवानों के लिए हॉस्पिटल में चेकअप के बाद तुरन्त रिपोर्ट देने की सुविधा होने की मांग की है.

दंतेवाड़ा जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एमके नायक ने भी मलेरिया से जवानों के पीड़ित होने की बात कही. डॉ. नायक ने बताया कि आए दिन जंगलों में होने वाले नक्सल अभियानों के कारण जवानों के बीमार पड़ने की आशंका जताते हुए बचने के लिए कई सलाह दी है.
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