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किरंदुल हॉस्पिटल में ब्‍लड बैंक बनने के दस साल बाद लगा पहला रक्‍तदान शिविर

किरंदुल हॉस्पिटल में अब खून की कमी से नहीं होगी मरीज की मौत

किरंदुल हॉस्पिटल में अब खून की कमी से नहीं होगी मरीज की मौत

किरंदुल परियोजना हॉस्पिटल में ब्लड बैंक की स्थापना के एक दशक बाद बीते रविवार को डोनेशन कैंप लगाया गया, जिसका शुभारंभ एनएमडीसी परियोजना प्रशासक ए. के. प्रजापति ने सबसे पहले ब्लड डोनेट कर किया. इसके बाद अन्य लोगों ने जरूरतमंदों के लिए अपना रक्तदान किया.

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छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में अब खून की कमी से किसी मरीज की मौत नहीं होगी. स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में लोगों ने आगे आकर रक्तदान किया. दरअसल, किरंदुल परियोजना हॉस्पिटल में ब्लड बैंक की स्थापना के एक दशक बाद बीते रविवार को डोनेशन कैंप लगाया गया था, जिसका शुभारंभ एनएमडीसी परियोजना प्रशासक एके प्रजापति ने सबसे पहले ब्लड डोनेट कर किया. इसके बाद अन्य लोगों ने जरूरतमंदों के लिए अपना रक्तदान किया.

पहले नक्सल प्रभावित क्षेत्र किरंदुल में सुदूर अंचलों के ग्रामीणों को ज्यादा परेशानी होती थी. मरीज के साथ अटेंडेंट न होने एवं अशिक्षा की वजह से ब्लड का अरेंजमेंट नहीं हो पाता था, लेकिन अब ब्लड के लिए जरूरतमंदों को परेशान नहीं होना पड़ेगा.

डॉक्टर सलि‍ल श्रीवास्तव ने बताया कि बेलाडीला की किरंदुल परियोजना हॉस्पिटल में पहली बार ब्लड डोनेशन कैंप लगाया गया. इसमें ब्लड टेस्ट समेत डोनेशन के लिए लोग सामने आए. पहले कैंप में 9 यूनिट ब्लड नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएमडीसी) के अधिकारी-कर्मचारियों ने जरूरतमंदों के लिए दिया. हॉस्पिटल प्रबंधन ने माह में दो बार डोनेशन कैंप लगाने का निर्णय लिया है, जहां लोगों में जागरूकता समेत ब्लड संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंंगी.

इधर, पेरपा ग्राम की रहने वाली हिड़मे को तेज कमर दर्द के कारण बेहोशी की हालत में किरंदुल हॉस्पिटल लाया गया था. उसे 3 यूनिट ब्लड लग चुका है और ये इसी ब्लड बैंक की वजह से संभव हो पाया. अब हिड़मे पूरी तरह स्वस्थ है और खुद भी रक्तदान की इच्छा जता रही है.

हॉस्पिटल की सीएमओ पूर्णिमा पटेल और सलिल श्रीवास्तव ने बताया कि इससे पहले हॉस्पिटल में मरीज के लिए परिजन ही ब्लड देते थे. वहीं अब हॉस्पिटल में प्रति माह दो बार डोनेशन कैंप लगाए जाएंगे. इसके लिए ग्रामीणों को भी जागरूक किया जाएगा, ताकि आपातकाल में जरूरतमंदों को ब्लड मिल सके. साथ ही लोगों को अपने रक्त समूह और मात्रा की भी जानकारी मिल सके.

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