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प्रशासन ने रात 12 बजे तक आंदोलन स्थल खाली करने का दिया नोटिस, नहीं तो होगी...

आदिवासी समाज का प्रदर्शन

आदिवासी समाज का प्रदर्शन

अधिकारियों का कहना है कि सभी नेता अंडरग्राउंड हो गए हैं. हम उन लोगों को चर्चा करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं. लेकिन...

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    छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा स्थित किरंदुल में पिछले छह दिनों से धरना दे रहे ग्रामीणों की मांग को राज्य सरकार ने मान ली है. हालांकि, इसके बाद भी ग्रामीणों का आंदोलन जारी है. ऐसे में सरकार अब सख्ती के मूड में नजर आ रही है. बुधवार की देर शाम एसडीएम नूतन कंवर ने नोटिस जारी कर रात 12 बजे तक धरना स्थल खाली करने का निर्देश दिया है. कहा जा रहा है कि यदि रात 12 बजे तक धरना स्थल खाली नहीं किया गया तो प्रशासन द्वारा बल का प्रयोग कर खाली करवाया जा सकता है. हालांकि, आंदोलन कर रहे किसी भी नेता को अभी तक नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है. अभी भी प्रदर्शनकारी ढोल और नगाड़ा बजाकर धरना स्थल पर नारेबाजी कर रहे हैं.

    सभी नेता हुए अंडरग्राउंड 

    वहीं, प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि सभी नेता अंडरग्राउंड हो गए हैं. हम उन सभी लोगों से चर्चा करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं. सरकार ने भी उनकी मांगे पूरी कर दी है. एसडीएम नूतन कंवर ने कहा कि यदि रात में धरना स्थल खाली नहीं होती है तो सुबह अंतिम सूचना देकर जगह खाली कराई जाएगी. उधर, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए डीआरजी की टीम को फिर से सक्रिय कर दिया गया है. इस बीच स्थानीय जनप्रतिनिधि बबलू सिद्दीकी और आदिवासी नेत्री सोनी सोरी मौके पर पहुंच कर ग्रामीण आदिवासियों के साथ रात में बल प्रयोग न करने की गुहार लगाई है.

    समिति के नेता कर रहे हैं गोपनीय बैठक

    एसडीएम कंवर ने कहा है कि बात करने यदि उनके लीडर नहीं आते हैं और ग्रामीण गांव लौटना चाह रहे हैं तो प्रशासन उनके साथ है. सुबह चाय- नाश्ते के बाद वाहनों से उन्हें भेजने की व्यवस्था की जाएगी. सूत्रों के मुताबिक आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समिति के नेता गोपनीय बैठक कर रहे हैं.

    नंदग्राम (नंदराज) पहाड़ी पर खनन का कर रहे हैं विरोध 

    बता दें कि आदिवासी बैलाडीला के नंदग्राम (नंदराज) पहाड़ी पर खनन की अनुमति का विरोध कर रहे हैं. आदिवासियों का मानना है कि नंदग्राम पहाड़ की पूजा वे अपने कुलदेव नंदराज के रूप में करते हैं, इसलिए वे उस पहाड़ की खुदाई होने नहीं दे सकते हैं. इसको लेकर ही बीते 7 जून से आदिवासियों का समूह एनएमडीसी के सामने धरना देकर प्रदर्शन कर रहा है.

    आदिवासी के देवताओं का घर है नंदराज पर्वत 

    संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति के मंगल कुंजाम ने बताया कि दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर ज़िला सहित पड़ोसी राज्य ओडिशा और महाराष्ट्र के हज़ारों आदिवासी के देवताओं का घर नंदराज पर्वत है और यह आदिवासियों की आस्था से जुड़ा हुआ सवाल है. यही वजह है कि आदिवासी नंदराज पर्वत की खुदाई के सख्त विरोध कर रहे हैं. बतातें चलें कि इस नंदग्राम (नंदराज) पहाड़ी की खुदाई का ठेका अडानी समूह की कंपनी को दिया गया है.

    रिपोर्ट- अब्दुल अमीद

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