इस साल देशभर में हुए 39 नक्सली हमले, 19 आम नागरिकों की गई जान
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इस साल देशभर में हुए 39 नक्सली हमले, 19 आम नागरिकों की गई जान
साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल के अनुसार 7 अप्रैल 2019 तक देश में कुल 38 माओवादी हमले हो चुके थे जिसमें 19 नागरिकों, सात सुरक्षाकर्मियों और 41 चरमपंथियों की जानें गईं.

साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल के अनुसार 7 अप्रैल 2019 तक देश में कुल 38 माओवादी हमले हो चुके थे जिसमें 19 नागरिकों, सात सुरक्षाकर्मियों और 41 चरमपंथियों की जानें गईं.

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  • Last Updated: April 10, 2019, 6:25 PM IST
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लोकसभा चुनाव से सिर्फ दो दिन पहले मंगलवार को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में एक नक्सली हमले में बीजेपी विधायक भीमा मंडावी की जान चली गई. उनके साथ चार सुरक्षाकर्मी भी मारे गए. देश में होने वाले चरमपंथी हमले की यह 39वीं घटना है.

दिल्ली आधारित ओपन डेटाबेस, साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल के अनुसार 7 अप्रैल 2019 तक देश में कुल 38 माओवादी हमले हो चुके थे जिसमें 19 नागरिकों, सात सुरक्षाकर्मियों और 41 चरमपंथियों की जानें गईं.





पिछले कुछ सालों में इस तरह के हमलों में सुरक्षाकर्मियों की होने वाली मौतों में कमी आई है. हालांकि, पिछली यूपीए-2 की सरकार की तुलना में नागरिकों की होने वाली मौतों के मामले में मोदी सरकार में थोड़ी कमी आई है. 2014 में जब मोदी सरकार बनी थी उस वक्त तक देश में 185 माओवादी घटनाएं देश में हो चुकी थीं. इसकी वजह से 127 नागरिकों और 97 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी. 2015 में इस तरह की घटनाओं में कमी आई. 2016 में चरमपंथी घटनाएं बढ़कर 262, 2017 में 199 और 2018 में चरमपंथी घटनाएं 217 हो गईं.
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कुल मिलाकर देखा जाए तो जून 2014 से लेकर दिसंबर 2018 तक 945 चरमपंथी घटनाएं हो चुकी हैं. इसमें 489 नागरिकों, 312 सुरक्षाकर्मियों और 821 चरमपंथियों की मौतें हुईं. इससे उलट यूपीए सरकार के दौरान जनवरी 2010 से मई 2014 के बीच 1292 चरमपंथी घटनाएं हुई थीं जिसकी वजह से 1272 नागरिकों, 660 सुरक्षाकर्मियों और 800 चरमपंथियों की मौत हुई.

अभी तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2010 सबसे ज्यादा खूनखराबे वाला साल रहा. इस साल कुल 482 चरमपंथी घटनाएं हुईं जिसमें 627 नागरिकों और 267 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई.

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इसके अलावा 2018 में भी कई बड़ी माओवादी घटनाएं हुईं. 30 अक्टूबर को दंतेवाड़ा में दूरदर्शन के एक कैमरामैन और सीआरपीएफ के एक जवान की मौत हो गई थी. 13 मार्च 2018 को सुकमा में हुए हमले में 9 सीआरपीएफ जवानों की मौत हुई थी.

साल 2013 में हुई एक बड़ी घटना में 25 कांग्रेसी नेताओं और साल 2017 में हुई एक घटना में 25 सीआरपीएफ जवानों की जान चली गई थी. ये दोनों हमले सुकमा में हुए थे.

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