यहां हमलों में नक्सली कर रहे तीर बम का इस्तेमाल

Abdul Hameed Siddique | News18Hindi
Updated: October 12, 2017, 2:49 PM IST
यहां हमलों में नक्सली कर रहे तीर बम का इस्तेमाल
नक्सली इन दिनों तीर बम का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं.
Abdul Hameed Siddique | News18Hindi
Updated: October 12, 2017, 2:49 PM IST
नक्सली अब देशी ​हथियारों को तकनीक के साथ जोड़कर उसका इस्तेमाल कर रहे हैं. इसी के तहत नक्सली इन दिनों तीर बम का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं. इन्हें जंगलों में ही तैयार किया जा रहा है.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सुकमा के बुर्कापाल मुठभेड़ में तीर बम से नक्सलियों ने जवानों को निशाना बनाया था.
इन दिनों पुलिस-नक्सली मुठभेड़ के बाद घटना स्थल और ध्वस्त कैम्पो से जवानों को भारी मात्रा में तीर बम बरामद हो रहे हैं.

अब ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि अत्याधुनिक हथियारों से लैस नक्सली देशी तीर बम का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मुठभेड़ के दरमियान छुपकर हमला करने वाले जवानों पर नक्सली तीर बम का इस्तेमाल करते हैं. रणनीति के तहत जवान मोर्चा संभाल कर फायरिंग करते है, जिन्हें नक्सली देख नहीं पाते हैं. ऐसे ही मौकों पर तीर बम चलाया जाता है.

तीर बम के फटते ही उसके अंदर का विस्फोटक और मेटल के छोटे—छोटे टुकड़े फैलकर चारो तरफ गिरते हैं
. इससे छुपे हुए जवानों को नुकसान के साथ बाहर निकलना मजबूरी हो जाती है. नक्सली स्थानीय संसाधनों से देशी हथियार तैयार कर रहे हैं.

सुरक्षा बलों की मानें तो नक्सलियों ने अब हमला करने के लिए अन्य विस्फोटकों के साथ तीर बम का उपयोग बढ़ा दिया है. हाल ही में कुआकोंडा थाना क्षेत्र के जियाकोरता और कोरमागोंदी जंगल में मुठभेड़ में अन्य हथियारों के साथ तीर बम का भी उपयोग किया गया. फोर्स द्वारा ध्वस्त नक्सली कैंप में भी अन्य सामाग्रियों के साथ बड़ी संख्या में तीर बम भी बरामद हुए हैं

इससे पहले भी डोडीतुमनार और पोर्राहिड़मा के पहाड़ी पर हुए मुठभेड़ के बाद बड़ी मात्रा में तीर बम बरामद हुए थे. इनमें कुछ बम के खोखे ही थे, जिनमे बारूद भरा जाना बचा हुआ था. नक्सलियों ने इसे पहाड़ के खोह में छिपाकर रखा था.

नक्सल आपरेशन के एएसपी गोरखनाथ बघेल का मानना है कि नक्सलियों के पास हथियारों की कमी है. इसलिए ही वे तीर बम का भी उपयोग करने लगे हैं. क्षेत्र में पिछले कुछ साल से तीर बम की बरामदगी हो रही है. जिले में पिछले छह माह में हुए मुठभेड़ और ध्वस्त कैंपों से बरामद अन्य सामग्रियों के साथ तीर बम भी मिले हैं. यह स्थानीय स्तर पर तैयार किया जाता है. तीर बम की मारक क्षमता भले ही कम है, लेकिन फोर्स के लिए यह भी घातक है.

पुलिस सूत्रों की माने तो करीब छह माह पहले सुकमा जिले के बुरकापाल घटना के बाद नक्सलियों द्वारा तीर बम से हमले बढ़ गए हैं. हालांकि इससे पहले सन् 2005 में बासागुड़ा क्षेत्र में, 2010 में ताड़मेटला, सन् 2014 में नारायणपुर जिले में भी तीर बम का उपयोग नक्सली कर चुके हैं, लेकिन तब तीर बम की मात्रा सीमित थी.

विभागीय जानकार बताते हैं कि नक्सली तीर बम के लिए एल्युमिनियम का खोखा तैयार करने के बाद उसमें बारूद, स्प्रिंग और डॉट आदि का उपयोग करते हैं. बम को बांस की खमचियों में फंसाकर धनुष से तीर की तरह छोड़ते हैं. बम गिरने या टकराने के बाद विस्फोट होता है। विस्फोट के बाद एल्युमिनियम एवं लोहे के छोटे-छोटे टुकड़े नुकसान पहुंचाते हैं.
First published: October 12, 2017
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