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मन्नत तो मांग सकती हैं पर इस मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकती हैं महिलाएं!

Abdul Hameed Siddique | News18 Chhattisgarh
Updated: September 30, 2018, 10:52 PM IST
मन्नत तो मांग सकती हैं पर इस मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकती हैं महिलाएं!
रामायण काल में निर्मित इस मंदिर में महिलाओं का आना है वर्जित

दंतेवाड़ा जिले में एक ऐसा मंदिर है, जहां महिलाओं की हर मुराद पूरी होती है, लेकिन महिलाओं को मंदिर के पास भी जाने की मनाही है.

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छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में एक ऐसा मंदिर है, जहां महिलाओं की हर मुराद पूरी होती है, लेकिन महिलाओं को मंदिर के पास भी जाने की मनाही है. रामायण काल से स्थापित जिले की मुकड़ी मावली मंदिर में वर्षों से पुरुष ही पूजा पाठ करते आ रहे हैं. प्रदेश भर से श्रद्धालु यहां माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. माता उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी करती है.

दंतेवाड़ा में मान्यताओं के चलते एक देवी मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्षों से वर्जित है. जानकारी मिलने पर न्यूज़ 18 की टीम दंतेवाड़ा जिले में स्तिथ उसी मंदिर पहुंची, जहां महिलाओं का मंदिर में आना वर्जित है. मुकड़ी मावली मंदिर छिंदनार ग्राम के जंगलों में स्थापित है. यह मंदिर गांव से दूर जंगल के एक टेकरी में जीर्ण-शीर्ण स्थिति में है, जहां महिलाएं जाना तो चाहती हैं लेकिन मान्यताओं के चलते मंदिर के आस-पास भी नहीं फटक पाती.

ऐसा कहा जाता है कि महिलाओं के मंदिर आने पर उसके परिवार और गांव में अनिष्ट होता है जबकि मंदिर में स्थापित मूर्ति भी एक देवी की है यानी महिला की. यह मंदिर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर छिंदनार गांव के जंगल में है.

ये है मान्यता और मंदिर की विशेषता

करीब 70 वर्षीय पुजारी मनोहर सिंह बताते हैं कि मंदिर की देवी मुकड़ी मावली माता का एक हाथ नहीं है और चेहरा विकृत है. दांत भींचे हुए और नाक सिकुड़ा हुआ है. मानो माता किसी दर्द और क्रोध में हैं. पुजारी का कहना है मंदिर की ख्याति इलाके में ही नहीं अन्य प्रदेशों में भी है. लोग मन्नत मांगने दूर-दूर से आते हैं. बीमारी से लेकर प्रेम प्रसंग से संबंधित लोग भी यहां पहुंचते हैं. यहां सबसे ज्यादा युवक अपने प्रेम को पाने के लिए आते हैं, लेकिन युवतियां मंदिर से दूर ही रहती हैं.

देवी है या प्रेतात्मा

ऐसा कहा जाता है कि गांव की एक गर्भवती महिला की प्रसव पीड़ा के दौरान मौत हो गई थी. परंपरा के अनुसार उसका शव गांव के मरघट में न दफनाकर इंद्रावती तट से लगे जंगल में फेंक दिया गया. उसकी आत्मा को मोक्ष नहीं मिलने से वह आसपास ही भटकती रहती थी और लोगों को परेशान करती थी. खासकर महिलाओं और युवतियों को परेशान करती थी, जिसे चरवाह भाइयों ने बांसुरी की धुन पर उसे अपने वश में कर लिया. तब प्रेतात्मा ने वहां किसी भी महिला को आने से मना कर दिया था. बहरहाल, तब से यह परंपरा चली आ रही है. इस मंदिर में पुरुषों की हमेशा मौजूदगी बनी रहती है.
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First published: September 30, 2018, 1:46 PM IST
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