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दंतेवाड़ा में नक्सल हमले के बाद डीजी बोले- IED ब्लास्ट से बचने की कोई ठोस रणनीति नहीं
Raipur News in Hindi

Ravi Dubey | News18Hindi
Updated: October 31, 2018, 12:35 AM IST

डीजी नक्सल ने कहा कि हम चारों ओर से सड़क बना रहे हैं. बीते तीन साल में सड़क निर्माण के दौरान कई बड़ी घटनाएं हुईं, हमारे जवान शहीद हो गए. हम किसी भी आईइडी (विस्फोटक) और एंबुश से निपटने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत है.

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  • Last Updated: October 31, 2018, 12:35 AM IST
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छत्तीसगढ़ में मंगलवार को हुए नक्सली हमले में दो जवान शहीद हो गए. इसके साथ ही दूरदर्शन के एक कैमरापर्सन की भी मौत हो गई. इस हमले के बाद छत्तीसगढ़ नक्सल ऑपरेशन के महानिदेशक डीएम अवस्थी ने News18 से खास बातचीत की.

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इस दौरान डीजी नक्सल ने कहा कि बस्तर में चुनाव कवरेज के लिए जाने वाले पत्रकार जाने से पहले बताएं और सुरक्षा की मांग करें तो सुरक्षा ज़रूर दी जाएगी, लेकिन सुरक्षित माहौल की बात को लेकर वो कोई भी आश्वासन देने से बचते रहे. बातचीत के दौरान इस बात का भी खुलासा हुआ कि पुलिस के पास आईईडी ब्लास्ट से बचने की कोई ठोस रणनीति नहीं है.

News18 संवाददाता रवि दूबे से बातचीत के दौरान डीजी नक्सल ने चुनावों के दौरान सुरक्षा के मुद्दे पर कहा, 'साल 2013 के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव के दौरान हुई घटनाओं का विश्लेषण करते हुए तैयारियां की गई हैं. चुनाव आयोग ने हमें सुरक्षाबलों की 550 कंपनियां और दी हैं. इसके साथ ही 100 कंपनियां हमारे पास पहले से ही हैं. कई ऐसी जगह जहां मतदान नहीं होता था, उनको भी मेन स्ट्रीम में लाने और वहां निडर मतदान कराने की तैयारी की गई है.'

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इलेक्शन के माहौल के दौरान नक्सलियों के बहिष्कार के ऐलान के पर डीजी नक्सल ने कहा, 'नक्सलियों को बैलेट नहीं बुलेट पर यकीन है. उनकी विचारधारा यही है कि वह लोकतंत्र में यकीन नहीं रखते. जब चुनाव आता है वह बहिष्कार करते हैं, गांव में मीटिंग करते हैं. पिछली बार और इस बार में फर्क यह है कि जहां सुरक्षाबल जा नहीं पाते थे, वहां हम उनके गढ़ को भेद चुके हैं. पूरे छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबल ऑपरेशन कर रहे हैं जिसके चलते वह अपने कोर इलाके में सिमट गए हैं.'

डीजी नक्सल ने कहा, 'हम चारों ओर से सड़क बना रहे हैं. बीते तीन साल में सड़क निर्माण के दौरान कई बड़ी घटनाएं हुईं, हमारे जवान शहीद हो गए. हम किसी भी आईईडी (विस्फोटक) और एंबुश से निपटने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत है.'आईईडी को डिटेक्ट करने के प्रश्न पर डीजी नक्सल ने कहा, 'पिछले 3 साल में हम औसतन 2-3 आईईडी निकालते हैं, जो 20 से 50 किलो तक के होते हैं. अगर हम इसे न निकालते तो सोचें कि कितना नुकसान हो सकता था. आईईडी में हमारे लिए सच में बड़ी चुनौती है. हम इसे डिटेक्ट करने में तकनीक का सहायता भी ले रहे हैं. हमारे पास मेटल डिटेक्टर समेत कई और तकनीकी चीजें हैं लेकिन ऐसी कोई तकनीक नहीं है कि हम पांच किलोमीटर पहले से ही आईईडी का पता लगा लें.'

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बाहर से आने वाले लोग, पत्रकार और मतदान दलों के लिए एडवाइजरी के सवाल पर डीजी नक्सल ने कहा, 'सुरक्षाबलों के लिए हमने एडवाइजरी के रूप में एक किताब जवानों को दी है. नक्सलियों के गढ़ में कोशिश रहती है कि वाहनों का उपयोग न हो, हमारे कार्यक्रम की कोई पहले से जानकारी न हो. यदि कोई पब्लिक मीटिंग या कैंपेन होता है तो आरओपी लगाई जाती है, जिसमें पहले से माइनिंग की जाती है, उसके बाद लोग वहां जाते हैं. जो लोग बाहर से आते हैं उन्हें फोर्स के साथ जाना चाहिए.'

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First published: October 30, 2018, 8:46 PM IST
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