छत्तीसगढ़ के इस गांव में होलिका दहन के बगैर मनाई जाती है होली, जानिए क्यों
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छत्तीसगढ़ के इस गांव में होलिका दहन के बगैर मनाई जाती है होली, जानिए क्यों
होली को लेकर धमतरी के एक गांव में अलग ही परंपरा है.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के धमतरी (Dhamtari) जिला मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूर बसे तेलिनसत्ती गांव मे आज भी बिना होलिका दहन के ही फागून का त्योहार होली मनाया जाता है.

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धमतरी. वक्त जरुर बदला, लेकिन तेलिनसत्ती गांव का दस्तूर नहीं बदला. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के धमतरी (Dhamtari) जिला मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूर बसे तेलिनसत्ती गांव मे आज भी बिना होलिका दहन के ही होली मनाई जाती है. गांव वालों की मान्यता है कि आग जलाने से उनके उपर आफत आ सकती है]  जबकि सदियों से चली आ रही इस परम्परा को युवा वर्ग भी अन्धविश्वास की बजाए आस्था से जोड़कर देखता है और इसे और संजोये रखने की बात कहता है.

धमतरी से सरहद के करीब तालाब के किनारे बने मन्दिर के इतिहास मे ही गांव के अनोखे दस्तूर की दांस्ता छीपी है. तेलिनसत्ती गांव में न होली जलाई जाती है और न ही दशहरे मे रावण का दहन किया जाता. वैसे इन त्योहारों की खुशियां और उमंग यहां छोटे से लेकर हर बड़े बुजुर्ग में बराबर ही नजर आती है, लेकिन इन दोनों मौकों पर गांव में आग नहीं जलती. अगर यह सब होता भी है तो सरहद के बाहर. सदियों से चले आ रहे इस दस्तूर से कोई बाहर आज भी नहीं जाना चाहता है.

इसलिए निभा रहे परंपरा
धमतरी के तेलिनसत्ती गांव के ही रहने वाले देवलाल सिन्हा व विशाल साहू का कहना है कि परंपरा तोड़ने पर गांव में आफत आ जाती है. सदियों पहले इस गांव में एक महिला अपने पति की चिता में सती हुई थी, तब से यह परम्परा चली आ रही है. वैसे पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही इस मान्यता पर आज की पीढ़ी भी यकिन रखती है और वे इसे आस्था से जोड़ते हुए आगे बढ़ाने की वकालत भी करही है.
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