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डॉग होगा केकला, मंकी बनेगा माकड़, अब कुछ इस तरह इंग्लिश पढ़ेंगे 'कमार बच्चे'
Dhamtari News in Hindi

Abhishek Pandey | News18 Chhattisgarh
Updated: February 25, 2020, 7:56 PM IST
डॉग होगा केकला, मंकी बनेगा माकड़, अब कुछ इस तरह इंग्लिश पढ़ेंगे 'कमार बच्चे'
बच्चों को पढ़ाने खास तैयारी सरकार कर रही है.

जानकारी के मुताबिक, धमतरी (Dhamtari) जिले में इसके लिए खास पाठ्यक्रम और विशेष प्रशिक्षित शिक्षकों की भर्ती भी की गई है.

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धमतरी.  दुनिया जहां एक तरफ 5जी की रफ्तार से ग्लोबल विलेज (Global Village) बनने की कगार पर है. वहीं कमार जनजाति आज भी अपने फॉरेस्ट विलेज (Forest Village) की छोटी सी दुनिया तक ही सीमित है. आज भी इस जनजाति के लोग शिकार और शराब से ही जीवन यापन करते हैं. आज तक ये अशिक्षित है. इसके पीछे एक बड़ा कारण भाषा और बोली का फर्क भी रहा है. लेकिन अब भाषा और बोली की खाई भी पाटने की तैयारी की जा रही है. कमारों को उन्हीं की बोली में शिक्षा देने की पहल सरकार करने जा रही है. पिछड़े और विलुप्त होने के खतरे में पड़े कमार जाति (Kamar Tribe) के लोगों को अब शिक्षा के जरिए दुनिया से जोड़ने की पहल की सरकार करेगी. जानकारी के मुताबिक, धमतरी (Dhamtari) जिले में इसके लिए खास पाठ्यक्रम और विशेष प्रशिक्षित शिक्षकों की भर्ती भी की गई है.


विशेष संरक्षित जनजाति है कमार





मालूम हो कि धमतरी में कमार जनजाति के लोग मूलत: शिकारी कहलाते हैं. ये जंगलों में रहते हैं और शराब बनाते हैं. इस जनजाति के लोग ज्यादातर जंगलों पर ही निर्भर रहते हैं. एक समय पर ये विलुप्ति की कगार पर थे. लेकिन इन्हें बचाने के लिए सरकार ने कई पहल किए. इन्हें विशेष संरक्षित घोषित किया गया और इनके नसबंदी पर प्रतिबंध लगाया ताकि जनसंख्या बढ़ सके. इस जनजाति की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार ने फिर कई योजनाएं चलाई. अब सरकार इनके शैक्षिक और सामाजिक उत्थान की दिशा में काम करने की तैयारी में. कमार बच्चों को पढ़ाने के लिए हिंदी भाषा में तैयार स्कूल पाठ्यक्रम का कमारी बोली में अनुवाद किया जा रहा है. इसके लिए कमार जाति के लोगों की ही मदद ली जा रही है. दावा किया जा रहा है कि अब तक कुल 80 प्रशिक्षित शिक्षकों की भर्ती भी कर ली गई है.


कुत्ते को केकला...बंदर को माकड़ पढ़ेंगे कमार


 सरकार का दावा है कि अभी पहली से पांचवीं तक के पाठ्यक्रम का अनुवाद किया जा रहा है. फिलहाल दूसरी कक्षा तक के पाठ्यक्रम का अनुवाद डाईट के माध्यम से एसआरटीसी को भेज दिया गया है. फिर इसका प्रकाशन करवा जाएगा और किताबें जिलों को भेजी जाएगी. फिलहाल, धमतरी में कुल 600 बच्चों को पढ़ाने के लिए चिन्हित कर लिया गया है जो कमारी बोली में कुत्ते को केकला कहेंगे तो शिक्षक इसे कुछ ऐसे पढ़ाएंगे डी फॉर डॉग...डॉग यानी की.. केकला... एम फॉर मंकी.. मंकी यानी की.. माकड़.




सरकार का दावा है कि सरकार का कहना है कि अगले सत्र से ये शिक्षा शुरू कर दी जाएगी.




ये है दावा


सरकार का कहना है कि अगले सत्र से ये शिक्षा शुरू कर दी जाएगी. कमरों को पढ़ाने के लिए नियुक्त शिक्षकों में से एक गोविंद साहू ने बताया कि कमरों को उन्हीं की बोली में शिक्षा देकर ज्यादा जल्दी और रोचक ढंग से पढ़ाई की जा सकती है. वहीं जिले के कलेक्टर रजत बंसल ने शासन की इस योजना को कमरों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला बताया है.







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First published: February 25, 2020, 7:52 PM IST
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