अपने 4 साल के भाई की जान बचाने वाली बहादुर बहन को मिलेगा वीरता पुरस्कार

छत्तीसगढ़ में धमतरी जिले के मगरलोड इलाके के सौगा गांव में रहने वाली खेमलता ने न सिर्फ अपनी जान जोखिम में डालकर अपने 4 साल के भाई की जान बचाई बल्कि अपनी सूझबूझ का परिचय भी दिया.

Abhishek Pandey | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: January 13, 2018, 5:20 PM IST
अपने 4 साल के भाई की जान बचाने वाली बहादुर बहन को मिलेगा वीरता पुरस्कार
अपने 4 साल के भाई की जान बचाने वाली बहादुर बहन को मिलेगा वीरता पुरस्कार
Abhishek Pandey | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: January 13, 2018, 5:20 PM IST
छत्तीसगढ़ में धमतरी जिले के मगरलोड इलाके के सौगा गांव में रहने वाली खेमलता ने न सिर्फ अपनी जान जोखिम में डालकर अपने 4 साल के भाई की जान बचाई बल्कि अपनी सूझबूझ का परिचय भी दिया. आपको बता दें कि खेमलता को तैरना नहीं आता फिर भी उसने तालाब के गहरे पानी में छलांग लगा दी और अपनी साहस का परिचय देते हुए अपने भाई की जान बचा ली.

दरअसल, घटना बीते साल अप्रैल महीने की है. इस पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद ने साल 2017-18 के राज्य वीरता पुरस्कारों की घोशणा कर दी है. इसमें धमतरी जिले की मगरलोड इलाके के सौगां गांव की रहने वाली खेमलता का नाम भी शामिल है.

बहरहाल, कई बार खेल खेल में बच्चों की जान आफत में पड़ जाती है. ऐसे हालातों में एक बहन ने अपने भाई के लिए भगवान का रूप धारण कर अपने साहस का परिचय दिया है. जिले के मगरलोड इलाके के सौगा गांव में रहने वाले 4 साल का पुष्पराज शाम को अपने दोस्तों के साथ तालाब में नहा रहा था. इसी दौरान नहाते वह पानी में डूबने लगा, तभी उसकी बड़ी बहन की नजर पुष्पराज पर पड़ी.

इस पर खेमलता ने अपनी जान को जोखिम में डालकर अपने भाई को बचाने के लिए तालाब में छलांग लगा दी. हैरत की बात यह है कि पुष्पराज करीब 10 मिनट तक पानी के अंदर था, लेकिन खेमलता ने ऐन मौके पर उसे पानी से निकालकर उसकी जान बचा ली. आपको बता दें कि खेमलता की उम्र महज 11 साल है. वह कक्षा 6 की छात्रा है, लेकिन उसने इतनी छोटी सी उम्र में अपनी हिम्मत का परिचय देते हुए इतना बड़ा कारनामा कर दिखाया है. इसकी हर कोई सराहना कर रहा है.

वहीं घटना की जानकारी परिजनों को देर शाम पता चली थी, जिसके बाद वे सहम गए थे. क्योंकि खेमलता को तैरना नहीं आता. स्थानीय लोगों और साहसी बच्ची के पिता की मानें तो कम उम्र में खेमलता ने साहस का काम कर दिखाया किया है. उसने एक जिंदगी को पानी में डूबने से बचाया है. वैसे खेमलता द्वारा अपने भाई की जान बचाए जाने की खबर गांव में आग की तरह फैल गई थी. वहीं साहसी बालिका खेमलता की मानें तो वो भविष्य में एक टीचर बनना चाहती है.

वहीं खेमलता के चयन होने से जिला प्रशासन भी खुश हैं. वहीं कलेक्टर सी. आर. प्रसन्ना ने खेमलता को बधाई देते हुए उसके रायपुर आने जाने की व्यवस्था करने की बात कही है.

बहरहाल, इसी तरह अपनी जान पर खेलकर दूसरों की जान बचाने वाले राज्य के कुल 6 वीर बालक और बालिकाओं को गणतंत्र दिवस के दिन सम्मानित किया जाएगा. बाल कल्याण परिषद ने 2017-18 के लिए 6 बहादूर बच्चों की चयन किया है.
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