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किसान की ये बेटी पंचर की दुकान संभालने से लेकर पढ़ाई तक में है माहिर

छत्तीसगढ़ में धमतरी जिले के कोलियारी गांव में गीतांजली साहू अपने पिता की पंचर दुकान चलाती है. यह बेटी परिवार पर बोझ नहीं है बल्कि परिवार का बोझ उठाने के लिए हाड़तोड़ मेहनत करती है.

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छत्तीसगढ़ में धमतरी जिले के कोलियारी गांव में गीतांजलि साहू अपने पिता की पंचर दुकान चलाती है. यह बेटी परिवार पर बोझ नहीं है बल्कि परिवार का बोझ उठाने के लिए हाड़तोड़ मेहनत करती है.

गृहस्थी से लेकर किसानी तक और दुकानदारी से लेकर ग्रेजुएशन की पढ़ाई तक हर विधा में गीतांजलि माहिर है. आपको बता दें कि गीतांजलि रोजाना 18 घंटे काम करती है. कोलियारी की गीतांजलि पर उसका परिवार ही नहीं बल्कि पूरा गांव भी उस पर गर्व करता है.

धमतरी की गीतांजलि ने कम उम्र में वो कर दिखाया है जिससे आज उसका परिवार, उसका गांव और उसका जिला कहता है कि बेटी हो तो ऐसी, जो हर काम में निपुण है. जिले के भखारा के पास कोलियारी गांव में जन्मी गीतांजलि ग्रामीण परिवेश में पली बढ़ी एक सामान्य किसान परिवार से ताल्लुक रखती है.



महज 18-20 की उम्र में गतांजलि ने अपने परिवार की मानों सारी जिम्मेदारी ही उठा ली है. पिता के पंचर दुकान का सारा बोझ उसने अपने कांधों पर उठा लिया है. देखने में वो आम लड़कियों की तरह नाजुक है, लेकिन वो आज जीप से लेकर ट्रैक्टर तक के पंचर अकेले बना लेती है.
इतना ही नहीं टायर उतारकर उसे खोलना, फिर पंचर बनाकर वापस गाड़ी में लगाना बड़ी ही फुर्ती से कर लेती है. ऐसा लगता है जैसे उसने किसी खास जगह से इसका प्रशिक्षण ले रखा हो, लेकिन यह काम उसने सिर्फ अपने पिता को देखकर सीखा है. इतना ही नहीं गीतांजलि की दुकान पर पंचर के अलावा और भी कई चीजें हैं जिनसे वो अपने परिवार के लिए एक अच्छी खासी कमाई कर लेती है.

बहरहाल, सुबह उठकर रोजाना घर का झाड़ू, पोछा, रसोई और फिर इसके बाद कॉलेज जाना. यह सब गीतांजलि अकेले करती है. भखारा के कॉलेज में ग्रेजुएशन और आईआईटी की रोजोना क्लास अटेंड करने के बाद गीतांजलि वहां से लौटकर फिर से दुकान के वही सारे काम संभालती है.

वहीं गीतांजलि की सहेली संगीता तारक का कहना है कि गीतांजलि अपने हुनर के कारण कॉलेज में भी सबकी चहेती है. सभी को उस पर गर्व है. इसके अलावा कोलियारी की ये बेटी अपने गांव की भी शान है, गांव के किसी भी आदमी से उसके बारे में पूछने पर वह गीतांजलि की तारीफ करते नहीं थकते हैं.

वहीं इस बारे में गीतांजलि के पिता चिंताराम साहू का कहना है कि उनका काम अब ज्यादा बढ़ गया है, इसलिए वो दुकान में ज्यादा समय नहीं दे पाते, जिसमें अब उनकी बेटी हाथ बटाती है. सारे छोटे बड़े पंचर उनकी बेटी ही बनाती है. हालांकि चिंताराम साहू की इच्छा है कि उनकी बेटी आगे पढ़ लिखकर एक शिक्षक बने. उन्होंने कहा कि वो अपने बेटे पर जितना भरोसा नहीं करते उससे ज्यादा वो अपने पर विश्वास करते हैं.

वहीं जब धमतरी के कलेक्टर सी. आर. प्रसन्ना को गीतांजलि के बारे में पता चला तो गीतांजलि के उज्जवल भविष्य के लिए वो उसे हर संभव मदद के लिए तैयार हो गए.
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