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पानी की कहानी: इस गांव की नियति ही है गंदा पानी

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पड़ोसी धमतरी जिला मुख्यालय से महज तीस किलोमीटर दूर चंदनपुर गांव प्यासा है. हां ये गांव शुद्ध पानी का प्यासा है.

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न्यूज18 हिंदी की खास मुहिम 'पानी की कहानी' में हम आपको देश में दिनोंदिन गंभीर हो रहे पानी के हालात के बारे में बता रहे हैं. शहरी इलाकों में सरकारें भले ही लोगों के लिए पानी के इंतजाम करने में थोड़ी-बहुत सक्रियता दिखाती हैं, लेकिन गांव-देहात सरकार की उपेक्षा के शिकार हैं. इस रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ के जमीनी हालात की पड़ताल की गई हैः

छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेशभर में विकास के दावे कर रही है. शहरी इलाकों में बड़ी-बड़ी बिल्डिंग और चमचमाती सड़कें सरकार के इन दावों का प्रचार भी करती हैं, लेकिन शहरी इलाके से कुछ ही दूर जाने पर दावों की पोल खुलने लगती है. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पड़ोसी जिले धमतरी में ऐसा ही एक नजारा आम है.

धमतरी जिला मुख्यालय से महज तीस किलोमीटर दूर चंदनपुर गांव प्यासा है. हां ये गांव शुद्ध पानी का प्यासा है. चंदनपुर केरेगांव के पास डोकाल पंचायत का आश्रित गांव है. घने जंगलों के बीच इस बस्ती में सभी कमार जाति के लोग रहते हैं.



सड़क, शिक्षा बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे इस गांव की सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की है. यहां लोगों को पीने के पानी के लिए संघर्ष करते देखा जा सकता है. पानी भी जिसे शायद जानवर भी न पियें. ऐसे पानी से गांव के लोग अपनी प्यास बुझाने मजबूर हैं.
गांव की उषा बाई, चित्ररेखा व फागुराम बताते हैं कि गांव का कुंआ ढह चुका है.
गर्मी में हैंडपंप भी सूख गए हैं और अब नाले में झरिया (गड्ढा) बना कर गांव अपना गुजारा कर रहा है. ये सिलसिला कोई आज की बात नहीं बल्कि पीढ़ियों से ऐसा ही चला आ रहा है.

चंदनपुर के जुगनू व फागुराम कहते हैं कि पीने का गंदा पानी और असुविधाएं इस गांव की नियति है. क्योंकि यहां न तो कोई नेता आता है और न ही अधिकारी तो फिर शिकायत करें तो किससे. शायद गांव तक पहुंचने के लिए अच्छी सड़क नहीं है. इसलिए चुनाव के समय भी नेता वोट मांगने तक नहीं आते.

धमतरी के आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारी बीआर बंजारे का कहना है कि गांव को लेकर कोई जानकारी नहीं थी. अब न्यूज 18 के ​जरिए जानकारी मिली है तो जल्द ही कामगार कदम उठाए जाएंगे. ग्रामीणों को जल्द ही मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगीं.

न्यूज18 हिंदी की इस खास सीरीज में आप भी अपनी पानी की कहानी साझा कर सकते हैं #PaaniKiKahani पर.

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