धमतरी: हस्तशिल्प प्रशिक्षण के जरिए महिलाएं बन रही हैं आत्मनिर्भर
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धमतरी के लोहरसिंग गांव में छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड का शिविर चल रहा है, जिसमें गरियाबंद से आए विशेषज्ञ ट्रेनिंग दे रहे हैं. बांस, कागज और लकड़ी से अलग-अलग सामान बनाकर महिलाएं इस कला में माहिर हो रही हैं.

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छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में महिलाएं अब आत्मनिर्भर बनने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी कामयाबी के झंडे गाड़ रहीं हैं. इसके लिए सरकार की योजनाएं महिलाओं की सीढ़ी बन रही हैं. बता दें कि सरकार की बिहान योजना में पहले ही बड़ी संख्या में महिलाएं ऑटो रिक्शा चलाकर अच्छी कमाई कर रही हैं. वहीं अब हस्तशिल्प कला के क्षेत्र में भी महिलाएं अपना कौशल दिखा रही हैं.

दरअसल, धमतरी के लोहरसिंग गांव में छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड का शिविर चल रहा है, जिसमें गरियाबंद से आए विशेषज्ञ ट्रेनिंग दे रहे हैं. बांस, कागज और लकड़ी से अलग-अलग सामान बनाकर महिलाएं इस कला में माहिर हो रही हैं.

हस्तशिल्प सीखने वालों में युवतियों के साथ गृहणियां भी काफी रुचि ले रही हैं. 3 माह के कोर्स को सीखने वाली महिलाओं को बोर्ड की तरफ शिल्प कला के साथ 1500 मानदेय भी दिया जाता है. ट्रेनी महिलाओं को इस ट्रेनिंग से आत्मनिर्भरता मिल रही है. साथ इससे उनका आत्मविश्वास भी झलकता है.



छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड से चुनी हुई महिलाओं को आगे के 6 माह के प्रशिक्षण के लिए ले जाया जाएगा, जहां मानदेय 7 हजार होगा. इसके बाद अपना स्टार्टअप करने वाली महिलाओं को मुफ्त में कच्चा माल भी दिया जाएगा.
बहरहाल, घरेलू काम काज के साथ हस्तशिल्प से अपना रोजगार खड़ा करना ग्रामीण महिलाओं को समाज में ऊंचा दर्जा तो दिलाएगा ही, साथ ही उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा.

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