बाल संप्रेक्षण गृह में मारपीट मामला: बच्चों को पीटने के आरोप में चाइल्ड वेलफेयर ऑफिसर सहित 7 बर्खास्त

अपचारी की शिकायत पर पुलिस ने दो मामले तो दर्ज कर लिए, लेकिन शिकायत के आधार पर जितनी मजबूत धाराएं लगनी चाहिए थी, वो पुलिस ने नहीं लगाई.

Mithilesh Thakur | News18 Chhattisgarh
Updated: July 9, 2019, 4:19 PM IST
बाल संप्रेक्षण गृह में मारपीट मामला: बच्चों को पीटने के आरोप में चाइल्ड वेलफेयर ऑफिसर सहित 7 बर्खास्त
अपचारी की शिकायत पर पुलिस ने दो मामले तो दर्ज कर लिए, लेकिन शिकायत के आधार पर जितनी मजबूत धाराएं लगनी चाहिए थी, वो पुलिस ने नहीं लगाई.
Mithilesh Thakur
Mithilesh Thakur | News18 Chhattisgarh
Updated: July 9, 2019, 4:19 PM IST
दुर्ग के बाल संप्रेक्षण गृह में अपचारी बालक पर अत्याचार करने के आरोपों से घिरे बाल कल्याण अधिकारी कवल्य साहू, केयर टेकर कांता श्रीवास समेत 7 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है. इन पर बच्चों को पाइप से पीटने के गंभीर आरोप है. मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अंकित आनंद ने यह कार्रवाई की है.

क्या है पूरा मामला

9 महीने पहले छेड़छाड़ के जुर्म में बाल संरक्षण गृह पहुंचे कैदी से वसूली की डिमांड होने लगी थी. उसके इंकार करने पर शेल्टर होम के अधिकारी और कर्मचारियों ने पाइप से उसकी पिटाई की थी. वहीं दूसरे अपचारी ने भी किशोर न्याय बोर्ड में मारपीट किए जाने की शिकायत की थी. बोर्ड के आदेश पर पुलगांव थाने में इसकी शिकायत दर्ज हुई थी.

पुलिस ने कमजोर धाराओं में मामला किया दर्ज

अपचारी की शिकायत पर पुलिस ने दो मामले तो दर्ज कर लिए, लेकिन शिकायत के आधार पर जितनी मजबूत धाराएं लगनी चाहिए थी, वो पुलिस ने नहीं लगाई. मामले में वकील का कहना है कि बंद करने में मारपीट होने पर धारा 341, 342 भी लगाई जानी चाहिए, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया. वहीं इस मामले में राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया था. नोटिस के जवाब से असंतुष्ट राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोन ने उनसे दोबारा जवाब तलब किया है. इसी मामले की सुनवाई करने के लिए आयोग की टीम अब 11-12 जुलाई को राजनांदगांव आएगी.

स्थानीय वकील का कहना है कि धारा 323 उस दशा में लगाई जाती है, जब साधारण मारपीट हुई हो. पर बंद कमरे में ऐसा हो तो धारा 341, 342 भी लगाई जानी चाहिए.
स्थानीय वकील का कहना है कि धारा 323 उस दशा में लगाई जाती है, जब साधारण मारपीट हुई हो. पर बंद कमरे में ऐसा हो तो धारा 341, 342 भी लगाई जानी चाहिए.


संप्रेक्षण गृह के अधीक्षक सुमित गुंडेचा को भी शो-कॉज
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बर्खास्त कर्मचारी मनोज यदु को पैसे लेकर नशे का सामान देने के आरोप लगने पर करीब दो साल पहले हटाया गया था। लेकिन बाद में उसे दोबारा तैनाती दे दी गई. वहीं दूसरे बर्खास्त कर्मचारी रोमन जोशी को भी ऐसे ही मामले में दोबारा बाल संप्रेक्षण गृह में ड्यूटी दे दी गई. गौरतलब है कि इस मामले में सात कर्मचारियों की बर्खास्तगी के अलावा संप्रेक्षण गृह के अधीक्षक सुमित गुंडेचा को भी शो-कॉज नोटिस भेजा गया है.

मजिस्ट्रेट ने नगर सैनिक समेत अधीक्षक के खिलाफ अपराध दर्ज करने के आदेश दिए थे. लेकिन अभी तक थाने से कोई कार्रवाई नहीं की गई है.
मजिस्ट्रेट ने नगर सैनिक समेत अधीक्षक के खिलाफ अपराध दर्ज करने के आदेश दिए थे. लेकिन अभी तक थाने से कोई कार्रवाई नहीं की गई है.


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First published: July 9, 2019, 4:15 PM IST
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