दुर्ग में दिल दहला देने वाले हालात: श्‍मशान घाट से बस्तियों तक पहुंच रही हैं अधजली लाशें!

दुर्ग में कोरोना मृतकों के कई शवों का रोज़ाना संस्कार किया जा रहा है.

दुर्ग में कोरोना मृतकों के कई शवों का रोज़ाना संस्कार किया जा रहा है.

Corona News: कोरोना वायरस (Covid-19) के संक्रमण से फैली महामारी बीच छत्‍तीसगढ़ में भी हालात भयावह होते जा रहे हैं. स्‍थानीय लोग दहशत में हैं.

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दुर्ग. ज़िले में अप्रैल का महीना बेहद डरावना लगने लगा है. कोरोना संक्रमण की वजह से दुर्ग में दहशत के हालात हैं. आपको हैरानी हो सकती है यह जानकर कि ज़िले के मुक्तिधामों (श्‍मशान घाट) में पांव रखने की भी जगह नहीं बची है. लगभग सभी मुक्तिधामों का यही हाल है, जहां प्रतिदिन दर्जन भर से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है, लेकिन फिर भी जगह कम पड़ रही है. महामारी के कहर को समझने के लिए यह स्थिति बेहद डरावनी हो गई है और इस बीच स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही को लेकर भी लोग नाराज़ हैं.

छत्तीसगढ़ के दुर्ग ज़िले के जामुल पालिका क्षेत्र के लोग इन दिनों भारी दहशत में हैं, क्योंकि प्रतिदिन ज़िले में आ रहे कोरोना के आंकड़े एक ओर लोगों को डरा रहे हैं तो दूसरी ओर जामुल क्षेत्र में अंतिम संस्कार के लिए पहुंच रही लाशें लोगों के रोंगटे खडे़ कर रही हैं. जामुल पालिका क्षेत्र के एकमात्र मुक्तिधाम में प्रतिदिन कई लाशों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है, लेकिन किस तरह?

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स्वास्थ्यकर्मी अपनी पीपीई किट आदि खुले में ही फेंककर जा रहे हैं.


लापरवाही का नमूना

तरीका यह बन गया है कि हर रात शवों को लाकर सांस्कृतिक मंच पर रख दिया जाता है और उसके बाद अगले दिन लाशों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है. इस पूरी प्रक्रिया से ग्रामीण बेहद भयभीत हैं. इधर, ग्रामीणों को डराने का दूसरा कारण भी स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने दे दिया है.



ग्रामीणों ने न्यूज़18 संवाददाता को बताया कि अंतिम संस्कार करने पहुंचने वाले कर्मचारी अपनी पीपीई किट खुले में ही फेंक रहे हैं. वहीं, कुछ शवों को ठीक से जलाया भी नहीं जा रहा. आलम यह हो गया है कि क्षेत्र के कुत्ते पीपीई किट पहने और अधजले शवों को लेकर बस्तियों तक भी पहुंच रहे हैं. इस पूर माहौल में ग्रामीण भारी दहशत में हैं.

पालिका प्रबंधन से गुहार

इस बारे में क्षेत्र के पार्षद युवराज वैष्णव ने प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है. ज्ञापन के माध्यम से क्षेत्र के ग्रामीणों में फैल रही दहशत का उल्लेख करते हुए बाहर से लाई जा रही लाशों को जलाने की मांग प्रशासन से की गई है. वहीं, शवदाह के काम में लगे कर्मियों को सही गाइडलाइन्स के तहत काम करने की मांग भी की गई है.
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