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कोरोना या स‍िस्‍टम की वजह से हुई इस 2 महीने की बच्‍ची की मौत? कैसे पॉजिट‍िव र‍िपोर्ट मरने के बाद हुई नेगेट‍िव

कोरोना या स‍िस्‍टम की वजह से हुई इस 2 महीने की बच्‍ची की मौत? कैसे पॉजिट‍िव र‍िपोर्ट मरने के बाद हुई नेगेट‍िव

छत्‍तीसगढ़ के भिलाई में रहने वाले एक दंपत्ति की दुधमुंही महज 2 माह की बच्ची क‍ि इसलिए मौत हो गई कि उसे कोरोना पॉजिट‍िव बता दिया गया.

छत्‍तीसगढ़ के भिलाई में रहने वाले एक दंपत्ति की दुधमुंही महज 2 माह की बच्ची क‍ि इसलिए मौत हो गई कि उसे कोरोना पॉजिट‍िव बता दिया गया.

Chhattisgarh News: छत्‍तीसगढ़ की बच्ची को आज ऐसी सजा मिली है कि वो सदा-सदा के लिए अपनों से दूर हो गई है. दुनिया देखने से पहले ही जालिम दुनिया ने उसकी जिंदगी छीन ली. अब बची है तो बस परिजनों के आंसूओं की बहती धाराओं में उसकी यादें. महज 2 माह की रूही के साथ जो कुछ भी हुआ उसे सुनकर आपकी भी रूह कांप उठेगी.

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कोरोना मरीजों के बेहतर इलाज का दंभ भरने वाले छत्‍तीसगढ़ प्रशासन की आज हम ऐसी हकीकत बताने जा रहे है, जिसने सारे दावों को खोखला साबित कर दिया है. दरअसल छत्‍तीसगढ़ के भिलाई में रहने वाले एक दंपत्ति की दुधमुंही महज 2 माह की बच्ची क‍ि इसलिए मौत हो गई कि उसे कोरोना पॉजिट‍िव बता दिया गया. फिर परिजन बच्ची को लेकर दुर्ग से रायपुर तक का सफर तय करते रहे, लेकिन उस बच्ची का इलाज करना तो दूर उसे भर्ती करना तक स्वास्थ्य विभाग ने उचित नहीं समझा. आखिरकार इलाज नहीं मिलने पर उसकी मौत हो गई, लेकिन सबसे बड़ी बात जब मौत हो गई तब उस बच्ची की रिपोर्ट निगेटिव आ गई. इस मौत ने अब प्रशासनिक कामकाज पर कई सवाल खड़े कर दिए है.

जिस बच्ची का कोई कसूर ही नहीं था उस बच्ची को आज ऐसी सजा मिली है कि वो सदा-सदा के लिए अपनों से दूर हो गई है. दुनिया देखने से पहले ही जालिम दुनिया ने उसकी जिंदगी छीन ली. अब बची है तो बस परिजनों के आंसूओं की बहती धाराओं में उसकी यादें. महज 2 माह की रूही के साथ जो कुछ भी हुआ उसे सुनकर आपकी भी रूह कांप उठेगी.



रूही को दुर्ग जिला चिकित्सालय में कोरोना पॉज‍िट‍िव बता दिया गया और उसे रायपुर जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया. बच्ची के मामा श्रीकांत दास ने बताया क‍ि इसके बाद रूही अपने परिजनों के साथ सिर्फ एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक घूमती रही, लेकिन उसे इलाज नसीब नहीं हो पाया. बच्ची को लेकर भटक रहे परिजनों ने अपनी आपबीती चिकित्सकों को बताई, लेकिन जैसे उनकी मानवीय संवदनाएं मर गई थी. आखिरकार उस दुधमुंही बच्ची ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया.

रूही की इलाज के अभाव में दर्दनाक मौत होने के बाद परिजन उसका अंतिम संस्कार करने जब घर लौटे तो एक मोबाइल में आई रिपोर्ट ने उन्हें चौका दिया. रूही की रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन 2 माह की जगह 20 वर्ष लिखा गया था. देखकर परिजनों के होश उड़ गए. कुदरत को शायद यही मंजूर था कि जो कसूर उसका था ही नहीं उसकी सजा दे दी गई. इस मामले की शिकायत बच्ची के मामा ने सीएचएओ दुर्ग डॉ. गंभीर सिंह ठाकुर और दुर्ग कोतवाली थाना में की है.

इस पूरी घटना ने प्रशासन की लचर व्यवस्था को उजागर कर दिया है. आखिर जब परिजन बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंचे तो उसे कैसे कोरोना पॉजिट‍िव बता दिया गया. रायपुर जिला अस्पताल जानबूझकर क्यों रेफर किया गया? जहां कोरोना का इलाज होता ही नहीं है और क्यों प्रदेश के सबसे बडे़ अम्बेडकर अस्पताल में परिजन इलाज के लिए गिडगिडाते रहे और बच्ची को देखने और सुनने वाला कोई नहीं आया? क्या यही है व्यवस्था? क्या ऐसे ही होता है कोरोना संक्रमितों का इलाज? मानों आज एक बच्ची ने कुर्बानी देकर सिस्टम को दिखाने का प्रयास किया है, ताकि वर्तमान हातात कैसे है. यदि अब भी नहीं चेते तो हजारों लोगों की जान दावं पर लगी है. आज परिजन इसी लापरवाही का शिकार हुए है जो शासन और प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं.

Tags: Bhupesh Baghel, Chhattisgarh Administration, Chhattisgarh news, Corona Report

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