लोकसभा चुनाव 2019: दुर्ग में हावि रहेगा का कास्ट फैक्टर, जातिगत समीकरण साध रही पार्टियां
Durg News in Hindi

लोकसभा चुनाव 2019: दुर्ग में हावि रहेगा का कास्ट फैक्टर, जातिगत समीकरण साध रही पार्टियां
सांकेतिक तस्वीर

दुर्ग लोकसभा सीट पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के प्रत्याशी कुर्मी समाज से होने के कारण साहू और यादव समाज की भूमिका इस चुनाव में अहम हो गई है.

  • Share this:
लोकसभा चुनाव के दृष्टिकोंण से छत्तीसगढ़ की दुर्ग लोकसभा सीट राजनैतिक दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का गृह जिला होने के साथ ही दुर्ग पिछले चुनाव में कांग्रेस की एकमात्र प्रदेश की ऐसी सीट रही है, जहां कांग्रेस ने कब्जा जमाया. लिहाजा कांग्रेस के इस किले को भेदने के लिए भाजपा ने विजय बघेल को कांग्रेस की प्रतिमा चंद्राकर के सामने किया है.

दुर्ग लोकसभा सीट पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के प्रत्याशी कुर्मी समाज से होने के कारण साहू और यादव समाज की भूमिका इस चुनाव में अहम हो गई है. क्योकि दोनों ही समाजों की बाहुल्यता दुर्ग लोकसभा में अधिक है. दुर्ग में लोकसभा का चुनाव भाजपा कांग्रेस दोनों के लिए ही साख का चुनाव बन गया है. दुर्ग में भाजपा और कांगेस दोनों ने ही अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर अपने राजनैतिक पत्तों को खोल दिया है.

प्रतिमा चन्द्राकर.




भाजपा ने विजय बघेल तो कांग्रेस ने प्रतिमा चंद्राकर को टिकट देकर कुर्मी समाज को साधने का प्रयास किया है. कांग्रेस की प्रत्याशी प्रतिमा चंद्राकर जरूर यह स्वीकार करती हैं कि चुनाव काफी फायटिंग वाला रहेगा, लेकिन आम मतदाता कांग्रेस के साथ रहेंगे.



दुर्ग लोकसभा कुर्मी यादव और साहू समाज की बाहुल्यता वाला जिला रहा है. दोनों ही बड़े राजनैतिक दलों ने टिकट की लम्बी दौड़ में शामिल कई दिग्गजों की टिकट काटते हुए विजय बघेल और प्रतिमा चंद्राकर पर दांव लगाया है. ऐसे में साफ है कि भाजपा कांग्रेस कुर्मी समाज को साधने का प्रयास किए हैं, लेकिन यादव और कुर्मी समाज उनके प्रत्याशियों को टिकट न दिए जाने से नाराज हैं. इन्होंने पहले ही भाजपा कांग्रेस को इसके लिए अगाह कर दिया था.

विजय बघेल.


यादव और साहू समाज का साथ न होना भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए बड़ी चुनौती है, लेकिन सबसे अधिक चुनौती भाजपा के लिए मानी जा सकती है. क्योंकि कांग्रेस के दिग्गजों के गढ़ में भाजपा को अपनों से ही अभी भी जूझना पड़ रहा है. क्योंकि राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय, पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय और स्व.हेमचंद यादव जैसे गुटों में हमेशा से ही भाजपा बंटी रही है. भाजपा प्रत्याशी विजय बघेल इससे इत्तेफाक नहीं रखते. विजय बघेल का कहना है कि भाजपा के सभी मिलकर इस चुनाव को जीतेंगे.

पिछले चुनाव में भाजपा की सरोज पाण्डेय के सामने कांग्रेस के स्थानीय प्रत्याशी ताम्रध्वज साहू भारी पड़े थे. क्योंकि कांग्रेस ने जिले के जातिगत समीकरणों के आधार पर ताम्रध्वज साहू को टिकट देते हुए भाजपा के 30 वर्षो के गढ़ को भेदते हुए करीब 16 हजार 848 वोटों से जीत दर्ज की थी. अब जब दोंनों ही इस चुनाव में कुर्मी प्रत्याशी है तब यह चुनाव काफी रोचक होने की उम्मीद है. भाजपा कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि इससे अब कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

ये है जातिगत समीकरण
दुर्ग लोकसभा क्षेत्र में जातिगत समीकरणों को देखा जाए तो साहू समाज 30-35 प्रतिशत, कुर्मी समाज 20-22 प्रतिशत, यादव समाज12-15 प्रतिशत, सतनामी समाज 20-22 प्रतिशत की संख्या में हैं. ऐसे में किसी भी समाज को नाराज करना राजनैतिक दलों के लिए बड़ी भूल हो सकती है. बहरहाल दुर्ग में जातिगत समीकरण बेहद हावी है. देखना होगा कि इस परिस्थिति में भाजपा कांग्रेस कैसे अपनी नैया पार लगाते हैं.
ये भी पढ़ें: व्यापारी की हत्या के बाद पुलिस का एक्शन, ड्यूटी के बाद चौकीदारों को हथियार जमा करने के निर्देश 
छत्तीसगढ़: बीजेपी के नए प्रदेश कार्यालय में वास्तुदोष!... नेताओं ने बनाई दूरी 

लोकसभा चुनाव 2019: छत्तीसगढ़ में पीएम मोदी सहित ये स्टार प्रचारक बीजेपी के लिए मांगेंगे वोट 
एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading