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'धुएं के रूप में जहर उगल रही फैक्ट्रियों पर कार्रवाई नहीं होती'

पूरे विश्व में पर्यावरण दिवस जोरशोर से मनाया जा रहा है . हर ओर हमें वरदान में मिली प्राकृतिक संपत्ति को बचाने की बातें की जा रही है . वहीं बता दें कि अगर पर्यावरण प्रदूषण की बात की जाए तो छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला सबसे ज्यादा प्रभावित माना जाता है .
पूरे विश्व में पर्यावरण दिवस जोरशोर से मनाया जा रहा है . हर ओर हमें वरदान में मिली प्राकृतिक संपत्ति को बचाने की बातें की जा रही है . वहीं बता दें कि अगर पर्यावरण प्रदूषण की बात की जाए तो छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला सबसे ज्यादा प्रभावित माना जाता है .

पूरे विश्व में पर्यावरण दिवस जोरशोर से मनाया जा रहा है . हर ओर हमें वरदान में मिली प्राकृतिक संपत्ति को बचाने की बातें की जा रही है . वहीं बता दें कि अगर पर्यावरण प्रदूषण की बात की जाए तो छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला सबसे ज्यादा प्रभावित माना जाता है .

  • Last Updated: June 6, 2015, 8:22 AM IST
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पूरे विश्व में पर्यावरण दिवस जोरशोर से मनाया जा रहा है . हर ओर हमें वरदान में मिली प्राकृतिक संपत्ति को बचाने की बातें की जा रही है . वहीं बता दें कि अगर पर्यावरण प्रदूषण की बात की जाए तो छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला सबसे ज्यादा प्रभावित माना जाता है .

यहां एशिया का सबसे बड़ा स्टील प्लांट भिलाई में स्थापित है . इसी वजह से यहां से निकलने वाले धुएं की चपेट में आने से स्थानीय लोगों को तरह-तरह की बीमारियों का शिकार होना पड़ रहा है . जिसपर पर्यावरण प्रेमी लगातार रोक लगाने की मांग कर रहे हैं , तो वहीं जिले का पर्यावरण विभाग दुर्ग को प्रदूषण मुक्त जिला बनाने का दावा कर रहा है .

गौरतलब है कि प्रदेश में पर्यावरण प्रदूषण के मामले में तीन जिले सबसे ज्यादा दूषित माने जाते हैं , जिनमें राजधानी रायपुर , बिलासपुर और दुर्ग शामिल है . आंकड़ों के मुताबिक यहां ढाई हजार के करीब छोटे-बड़े उद्योगों को संचालित किया जा रहा है .



वहीं शहर में दो बड़ी सीमेंट कंपनी एसीसी और जेपी के साथ-साथ विद्युत पॉवर प्लांट और एशिया का सबसे बड़ा स्टील प्लांट बीएसपी भी यहां स्थापित है . बता दें कि बीएसपी स्टील प्लांट में करीब 65 बड़ी-बड़ी चिमनियों से 24 घंटे कार्बन युक्त जहरीला धुआं निकल रहा है , जो आसमान में घुलकर पर्यावरण को काफी प्रदूषित कर रहा है . आलम यह है कि ऐसी जहरीली स्थिति में पक्षी भी इस ओर पंख फैलाने से परहेज करते हैं . जहरीले धुएं की वजह से यहां के लोग कैंसर , चर्म रोग और दिल की बीमारी जैसे गंभीर रोगों के शिकार हो रहे हैं . प्रशासन भी हवा में घुलते इस जहर को रोकने में नाकाम साबित हो रहा है .
मानकों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और उद्योग संचालक लगातार लोगों की जान को दांव पर रख मनमानी कर रहे हैं . वैज्ञानिकों के अनुसार इस तरह से पर्यावरण प्रदूषित करने वाले उद्योगों के ऊपर विभाग को भारी भरकम जुर्माना लगाते हुए तत्काल इन्हें बंद करवाना चाहिए . अन्यथा विभाग को उद्योग संचालकों को कम प्रदूषण करने वाली मशीनों के प्रयोग के बारे में हिदायत देते हुए प्रदूषण नियंत्रण करने वाली मशीनों को लगाने के निर्देश देने चाहिए .

पर्यावरण वैज्ञानिक शम्स परवेज ने पर्यावरण के बदतर होते हालातों के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि धुएं के रूप में जहर उगल रही फैक्ट्रियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है . उन्होंने कहा दुनिया तकनीकी रूप से काफी आगे निकल चुकी है और इसे उद्योगों से जोड़कर देखा जाए तो आज प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए तरह-तरह की मशीनें आ रही हैं , लेकिन फैक्ट्री मालिक अपने मुनाफे को ध्यान में रखते हुए मशीनें लगाने से गुरेज करते है . उन्होंने कहा , हमारे देश के कानून में कोई कमी नहीं है बस कमी है तो इच्छाशक्ति की . सरकार को चाहिए की वो अपने बनाए कानूनों का उद्योग संचालकों से सख्ती से पालन करवा सकें . उन्होंने नियमों को न मानने वाले उद्योग संचालकों पर बड़े से बड़ा जुर्माना लगाए जाने की बात कही ताकि जुर्माने के खौफ से प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकें .

वहीं दूसरी ओर पर्यावरण विभाग के अधिकारियों की माने तो वे दुर्ग को प्रदूषित जिला नहीं मानते है . उनके अनुसार जिले के सभी कल-कारखानों में प्रदूषण के रोकथाम के लिए मशीनें लगाई जा रही हैं . अगर बात भिलाई स्टील प्लांट की जा रही हो तो अधिकारियों ने बताया कि हर महीने प्लांट के अलग-अलग यूनिटों की जांच की जाती है . खासकर वहां जहां प्लांट में सबसे ज्यादा प्रदूषण कोक ओवन और पॉवर प्लांट में है . इस बारे में और अधिक बताते हुए पर्यावरण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी अजय गेदाम ने कहा कि पॉवर प्लांट में कोयले की जगह पर अब गैस से उत्पादन करने के चलते प्रदूषण नहीं होता है . उन्होंने बताया कि प्रदूषण के चलते ही यहां की कोक ओवन भट्टी की एक यूनिट को बंद करवाया गया है और दो यूनिटों को इस संबंध में 6 माह का समय दिया गया है .

बहरहाल एक तरफ पर्यावरण वैज्ञानिक दुर्ग को सबसे प्रदूषित जिला बता रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर पर्यावरण विभाग जिले के प्रदूषण मुक्त होने का दावा कर रहा है . इन दोतरफा बयानों से जिले के लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है . फिलहाल पर्यावरण विभाग के दावों पर गौर किया जाए तो दुर्ग के सभी कल-कारखानों में जल और वायु प्रदूषण को नियंत्रित किए जाने के उपकरण लगे हुए हैं . लेकिन अगर जिले में प्रदूषण की बात की जा रही है तो इस सवाल की तल्खी का कोई तो वजूद होगा .

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