भारतीय ने बनाया पेट्रोल-डीजल दोनों पर चलने वाला ENGINE
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भारतीय ने बनाया पेट्रोल-डीजल दोनों पर चलने वाला ENGINE
भिलाई के कामथ द्वारा बनाया गया आरसीवीआर इंजन.

छत्तीसगढ़ की इस्पात नगरी भिलाई में पले-बढ़े युवा वैज्ञानिक दास अजी कामथ का एक अविष्कार इंज तकनीक के क्षेत्र में क्रांतिकारी साबित होने वाला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 15, 2017, 12:00 AM IST
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छत्तीसगढ़ की इस्पात नगरी भिलाई में पले-बढ़े युवा वैज्ञानिक दास अजी कामथ का एक अविष्कार इंजन तकनीक के क्षेत्र में क्रांतिकारी साबित होने वाला है. मुश्किल चुनौती समझी जाने वाली इंजन डिजाइन के क्षेत्र में उन्होंने अपनी बरसों की मेहनत और लगन के दम पर भविष्य की ऐसी तकनीक रोटो डायनैमिक वेरिएबल कम्बंशन रेश्यो (आरसीवीआर) विकसित कर ली है, जिससे इंजिन बिना किसी बदलाव के किसी भी ईंधन से चल सकता है.

युवा वैज्ञानिक दास अजी कामथ की इस तकनीक को दुनिया के 49 देशों में पेटेंट हासिल हो चुका है. अब इसे व्यावसायिक रूप से बाजार में उतारने का प्रयास किया जा रहा है. न्यूज 18 से चर्चा करते हुए कामथ ने बताया कि जर्मनी और इंग्लैंड सहित कुछ प्रमुख देशों ने ये तकनीक उनके देशों में पूर्ण रूपेण विकसित करने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन कामथ चाहते हैं कि उनका अपना देश भारत इस तकनीक का सूत्रपात करने वाला बने.

कामथ के मुताबिक भारत में अब तक इंजन तकनीक से जुड़ा कोई भी स्वतंत्र अविष्कार नहीं हुआ है और सारी जरूरतें आज भी आयातित (विदेशी) तकनीक से हो रही हैं. ऐसे में उनका अपना अविष्कार हमारे देश को इंजन तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान दिला सकता है.



Das Aji Kamath.




कामथ ने बताया कि भारत सरकार के 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के माध्यम से वह अपनी इजाद की गई इस क्रांतिकारी तकनीक को बाजार में उतारना चाहते हैं.


जानिए, क्या है आरवीसीआर तकनीक
कामथ के मुताबिक आरवीसीआर तकनीक के बाद पेट्रोल इंजन में डीजल और डीजल इंजन में पेट्रोल डालकर आसानी से चलाया जा सकता है. यहां तक कि ऐसे इंजन में हाइड्रोजन, एलपीजी या डीजल का इस्तेमाल भी सफलतापूर्वक किया जा सकता है. वहीं अन्य भारी ईंधन या बायो फ्यूल्स पर भी इंजन को चलाया जा सकता है. इससे न सिर्फ परिवहन के साधन कार, जीप व अन्य वाहन चलाए जा सकते हैं बल्कि इंजन तकनीक पर आधारित पंप, कम्प्रेशर व पवन-जल विद्युत उत्पादन के लिए जनरेटर भी ईंधन की उपलब्धता के आधार पर चलाए जा सकते हैं जो कि ऊर्जा संरक्षण और कार्बन फुटप्रिंट के लिहाज से भी बेहतर विकल्प है.

भिलाई में हुई परवरिश
भिलाई का नाम वैश्विक पटल तक ले जाने वालों में दास अजी कामथ का नाम प्रमुखता से शामिल है. उनके पिता कृष्ण दास कामथ भिलाई स्टील प्लांट के शुरुआती दौर के कर्मिकों में से थे, जिन्होंने बीएसपी की रेल एंड स्ट्रक्चरल मिल में सेवा दी. दास अजी कामथ का पूरा बचपन सेक्टर-5 में बीता है. उनकी स्कूली शिक्षा बीएसपी ईएमएमएस सेक्टर-5 और सीनियर सेकंडरी स्कूल सेक्टर-4 में हुई. सेक्टर-4 के बाद वे सपरिवार हुडको में रहे हैं और इन दिनों पुणे में निवासरत हैं.

स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने एनआईटी (आरईसी) दुर्गापुर से इंजीनियरिंग की डिग्री ली और मर्चेंट नैवी में मर्कंटाइल मरीन चीफ इंजीनियर का शानदार करियर बिताया. इंजन टेक्नालॉजी को लेकर अपने जुनून के चलते उन्होंने मर्चेंट नेवी का करियर स्वेच्छा से छोड़ दिया और अपना पूरा ध्यान अविष्कार में लगाया.
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