..तो यहां संस्कृत होगी बोलचाल की भाषा

Neelesh Tripathi | News18Hindi
Updated: October 13, 2017, 2:04 PM IST
..तो यहां संस्कृत होगी बोलचाल की भाषा
सांकेतिक फोटो.
Neelesh Tripathi | News18Hindi
Updated: October 13, 2017, 2:04 PM IST
बोलचाल में आम तौर पर लोग क्षेत्रीय भाषा, हिंदी या अंग्रेजी का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन जल्द ही बोलचाल की भाषा में संस्कृत का उपयोग भी होने लगेगा. इसके लिए सरकार द्वारा कवायद की जा रही है. छत्तीसगढ़ में इसकी शुरुआत दुर्ग जिले से होगी.

संस्कृत को आम भाषा बनाने के लिए दुर्ग जिले में करीब 20 जनभाषा केन्द्र खोले जा रहे हैं.
संस्कृत विद्यामंडलम्‌ और जिला शिक्षा विभाग से इसे सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है. इन केन्द्रों में दुर्ग जिला शिक्षा विभाग के संस्कृत विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी. दुर्ग जिले के 180 से अधिक संस्कृत शिक्षकों में से 22 ऐसे शिक्षकों का चयन किया गया है, जिन्हें संस्कृत भाषा में महारत हासिल है.

मिली जानकारी के मुताबिक जन भाषा केन्द्र में सेवाएं देने वाले शिक्षक समाजसेवी के रूप में केन्द्र का संचालन करेंगे और कोई शुल्क नहीं लेंगे. बताते हैं कि इस जन भाषा केन्द्र की कार्ययोजना दुर्ग जिला शिक्षा अधिकारी आशुतोष चावरे और संस्कृत विद्यामंडलम्‌ के सदस्य आचार्य नीलेश शर्मा ने तैयार की है.

शिक्षा अधिकारी चावरे व सदस्य नीलेश ने जन भाषा केन्द्र योजना का प्रस्ताव प्रदेश के स्कूली शिक्षा मंत्री केदार कश्यप को दी थी. प्रस्ताव को मंत्री ने अनुशंसित कर विद्यामडलम्‌ को भेज दिया. इसके बाद जन भाषा केन्द्र के संचालन की मंजूरी मिली.

दुर्ग के जिला शिक्षा अधिकारी आशुतोष चावरे ने बताया कि जन भाषा केन्द्र के लिए चयनित शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया है.
24 से 26 अक्टूबर तक दुर्ग में आयोजित इस कार्यशाला में दिल्ली से आए प्रशिक्षक शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे. इसमें बोलचाल की भाषा में संस्कृत के शब्दों को सरलता से कैसे शामिल किया जाए, इसकी जानकारी दी जाएगी.

शिक्षा अधिकारी चावरे ने बताया कि जनभाषा केन्द्र में बोलचाल की भाषा कुछ इस इस तरह लोगों को सिखाई जाएगी. जैसे नमस्कार को नमोनमः, आइए को आगच्छतु कहेंगे. बैठिए को उपविशतु, खाईए को खादतु, ग्रहण कीजिए को स्वीकारयतु, धन्यवाद को धन्यवादः बोलचाल की भाषा होगी.

संस्कृत विद्यामंडलम छत्तीसगढ़ के सदस्य आचार्य नीलेश शर्मा ने बताया कि दुर्ग में जन भाषा केन्द्र गांव और बस्तियों में शुरू हो रहा है. यहां किसी भी सार्वजनिक भवन में यह केन्द्र हर दिन शाम को दो से तीन घंटे चलेगा. चयनित संस्कृत शिक्षक इन केन्द्रों को ऐसे युवक के सौंप देंगे जो इसका नियमित व बेहतर संचालन आगे करता रहे.

इन स्थानों पर खुलेगा संस्कृत जनभाषा केन्द्र

रिसाली भिलाई, बोरसी दुर्ग, जामगांव आर, खुड़मुड़ी, जामगांव एम, बोरई, खुर्सीपार, वैशालीनगर भिलाई, मेड़ेसरा, जामुल, अंजोराख, कुरूद, सेलूद, भनसुली, बिरेझर, बोरी, तिलक स्कूल दुर्ग, रानीतराई, खपरी, लिटिया, ओदरहागहन में संस्कृत जनभाषा केंद्र खुलेंगे.
First published: October 13, 2017
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