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इसलिए खराब हो रही यहां की आबोहवा

प्रदूषण सांकेतिक फोटो

प्रदूषण सांकेतिक फोटो

छत्तीसगढ़ सहित देश भर में मशहूर शहर भिलाई व दुर्ग की आबोहवा अब खराब हो रही है. प्रदूषण की मार इतनी है कि पर्यावरण वैज्ञानिक इसे रहने के योग्य नहीं मानते.

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छत्तीसगढ़ सहित देश भर में मशहूर शहर भिलाई व दुर्ग की आबोहवा अब खराब हो रही है. प्रदूषण की मार इतनी है कि पर्यावरण वैज्ञानिक इसे रहने के योग्य नहीं मानते. सन् 2005 के बाद से क्लाइमेट बदल हो चुका है. इस शहर में प्रदूषण ढाई गुना बढ़ा है. पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय, रायपुर का रसायन और पर्यावरण विज्ञान विभाग इस मसले को लेकर राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंप चुके हैं. तेजी से बढ़ते उद्योगों की संख्या इसका प्रमुख कारण बताया गया है. दुर्ग—भिलाई के अलावा रायपुर, कोरबा व रायगढ़ की स्थिति भी काफी खराब बताई जा रही है.​

छत्तीसगढ़ की हवा, पानी पर रिसर्च करने वाले वैज्ञानिक सरकार को चेतावनी दे चुके हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार बढ़ती जनसंख्या, प्रदूषण उगलते कोयला आधारित उद्योग, लगातार कटते पेड़, वाहनों की रोजाना बढ़ती संख्या, सड़कों पर दौड़ते पुराने वाहन पर बैन नहीं लगा तो स्थिति और बिगड़ेगी. सबसे ज्यादा कोरबा, रायपुर स्थित औद्योगिक क्षेत्र उरला, भिलाई-दुर्ग के साथ रायगढ़ की भी सेहत खराब है.

60 प्रतिशत कार्बन
पर्यावरण वैज्ञानिकों के मुताबिक 2005 के बाद भिलाई का क्लाइमेट पूरी तरह से बदल गया है. भिलाई-दुर्ग के वायुमंडल और धूल में 60 प्रतिशत कार्बन है. जो देश के महानगरों से भी ज्यादा है. इसमें अकेले कोयला आधारित उद्योग (स्टील, सीमेंट सब शामिल) का कार्बन 10 प्रतिशत से भी अधिक है.

इस तरह बढ़ रहा प्रदूषण
सन् 2005 तक भिलाई—दुर्ग में प्रदूषण का स्तर पीएम 2.5 यानी 80 से 100 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर था, जो 2017 में बढ़कर 200 से 250 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर हो गया है. इन 12 सालों में भिलाई-दुर्ग का प्रदूषण ढाई गुना बढ़ा है.

यह है प्रमुख वजह
वैज्ञानिक बढ़ते प्रदूषण की वजह सन् 2005 के बाद भिलाई में हुए दो बड़े बदलाव को मानते हैं. पुरैना (भिलाई-3) स्थित एनएसपीसीएल के पांच सौ मेगावॉट के पावर प्लांट व भिलाई स्टील प्लांट का विस्तारीकरण. पुरैना पावर प्लांट में रोजाना 40 हजार टन कोयला जलता है. इसी तरह बीएसपी ने भी चिमनी से निकलने वाले धुएं को फोकस न कर विस्तारीकरण पर ध्यान दिया. इन दो बड़ी वजहों के चलते भिलाई का तापमान व प्रदूषण दोनों बढ़ गए.

सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का भी ध्यान नहीं
हाल ही में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गाइड लाइन तय की थी. जहां भी कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा हो, उसके चारों तरफ ग्रीन मैट लगाना जरूरी है. इस आदेश को भी दुर्ग जिले में फालो नहीं किया जा रहा है. इससे भी प्रदूषण पर नियंत्रण हो पाना मुश्किल है.

ड़ित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के केमेस्ट्री डिपार्टमेंट के प्रो. शम्स परवेज की मानें तो भिलाई की स्थित भयावह है. एक दशक में भिलाई में काफी बदलाव आया है. प्रदूषण में ढाई गुना तक इजाफा हुआ है. वायु मंडल में कार्बन की मात्रा 60 प्रतिशत बढ़ी है. जो महानगरों के प्रदूषण से भी ज्यादा है. भिलाई के लोगों की सेहत बिगड़ रही है. कुछ दिन बाद दुर्ग-भिलाई रहने योग्य नहीं रह पाएगा.

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