दुर्ग में 'लाल' हुआ टमाटर, खरीदारों के छूट रहे पसीने
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इन सब्जियों में शहंशाह टमाटर बना हुआ है, जो 50 से 60 रूपए किलो तब बिक रहा है. दुर्ग जिला टमाटर बाहुल्यता वाला इलाका माना जाता है, लेकिन आज यही टमाटर लोगों को आंखें दिखा रहा है.

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छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला प्रदेश में सब्जी उत्पादन वाले जिलों में प्रमुखता से लिया जाता है . जिले का टमाटर न सिर्फ देश के विभिन्न हिस्सों में बल्कि विदेशों तक जाता है. लेकिन जिले की वर्तमान हालात ये है कि लोगों को टमाटर आंखें दिखाने लगा है.  कुछ समय पहले सब्जी उत्पादक टमाटर को सड़कों पर फेंकने मजबूर थे, वहीं आज टमाटर 50 से 60 रुपए किलो तक बिक रहा है .

टमाटर के साथ सब्जी भी महंगी

दुर्ग जिले की मंडियों में इन दिनों ग्राहक तो दिख रहे हैं, लेकिन इनकी खरीददारी आधी हो गई है . वर्तमान में सब्जियों के भाव में आई तेजी ने लोगों का सारा बजट बिगाड़ दिया है. सब्जी मंडी में कोई भी सब्जी 40 रूपए से कम नहीं बिक रही है. इन सब्जियों में शहंशाह टमाटर बना हुआ है, जो 50 से 60 रूपए किलो तब बिक रहा है. दुर्ग जिला टमाटर बाहुल्यता वाला इलाका माना जाता है, लेकिन आज यही टमाटर लोगों को आंखें दिखा रहा है.



प्रबंधन के अभाव में फेंकना पड़ता है टमाटर



जिले की मंडियों में सिर्फ टमाटर ही नहीं बल्कि सब्जियां भी लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही है . एक अनुमान के मुताबिक दुर्ग जिले में करीब 10 से 15 हजार एकड़ में टमाटर का उत्पादन किया जाता है. एक एकड़ में सीजन के दौरान करीब 200 क्विंटल तक टमाटर का उत्पादन होता है. राज्य सरकार की अनदेखी के चलते हर वर्ष बंपर टमाटर होने पर किसान उसे संरक्षित नहीं रख पाते और उन्हें इसे सड़कों पर फेंकना पड़ जाता है.

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