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Exclusive: नक्सलियों को नहीं मिल रहा नेता, तेलुगु भाषी चाहते हैं बस्तर पर कब्जा
Bastar News in Hindi

Vinod Kushwaha
Updated: January 2, 2020, 3:04 PM IST
Exclusive: नक्सलियों को नहीं मिल रहा नेता, तेलुगु भाषी चाहते हैं बस्तर पर कब्जा
वर्दीधारी नक्सलियों ने इस घटना को अंजाम दिया है. (File Photo)

वहीं हार्डकोर नक्सली नेता रामकृष्ण और पापाराव इस पद को संभालने मे इच्छुक नहीं हैं.

  • Last Updated: January 2, 2020, 3:04 PM IST
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जगदलपुर. नक्सलियों (Naxalism) के बीच नेतृत्व का संकट खड़ा हो गया है. नक्सली नेता और दंडकारप्ण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सचिव रमन्ना (Naxal leader Ramanna death) की मौत के बाद से संगठन को अब तक कोई विकल्प नही मिल है. नक्सली शीर्ष नेतृत्व इस पद की कमान के लिये छत्तीसगढ़ के नक्सली (Naxalites in Chhattisgarh) नेताओ पर अविश्वास जताते हुये उन्हें बागडोर सौपने से परहेज कर रहा है. वहीं हार्डकोर नक्सली नेता रामकृष्ण और पापाराव इस पद को संभालने मे इच्छुक नहीं हैं.

सूत्रो के मुताबिक दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सीनियर मेंबर भी कमांडर बनने से इंकार कर चुका है. साथ ही सीनियर मेंबर गणेश उईके की तबीयत भी डांवाडोल है. इसलिये स्वास्थगत कारणो का बहाना बनाकर यह जिमेमदारी लेने से बच रहे है.

यह भी माना जा रहा है कि दुर्दांत नक्सली नेता हिडमा इस अहम जवाबदारी को संभालने को तैयार है. लेकिन शीर्ष संगठन उस पर भरोसा नही कर रहा है. चौकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि कमाई की दृष्टि बस्तर नक्सली संगठन के लिये प्रमुख स्थान रखता है. इसलिये शीर्ष नेतृत्व बस्तर को तेलगु भाषी वाले कैडर के नीचे रखना चाह रहे है.



बस्तर आईजी सुदंरराज. पी. ने बताया कि रमन्ना की मौत के पहले से ही संगठन काफी कमजोर हो गया है. अब रमन्ना की मौत के बाद बाद कोई भी बड़ा नक्सली नेता इस पद को संभलाने सामने नही आ रहा है.



वहीं नक्सलियों की हर रणनीति पर सुरक्षा बल मुस्तैद है और आने वाले दिनो में प्रमुख कैडरो पर फोकस किया जायेगा. जिससे जल्द ही बस्तर नक्सल मुक्त हो सके

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First published: January 2, 2020, 2:58 PM IST
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