स्कूल को गांव में लाने के लिए आदिवासी बच्चों का आंदोलन

गरियाबंद जिले का आदिम जाति कल्याण विभाग अपनी कार्यशैली को लेकर पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में बना हुआ है.विभाग की लापरवाही के कारण चार दिन पहले कमार जनजाति के लोग अपनी 5 सूत्रीय मांगों को लेकर पदयात्रा करने पर मजबूर हुए और अब आदिवासी समाज के बच्चे आश्रम को लेकर पदयात्रा करने पर मजबूर हो रहे हैं.जिन नन्हें बच्चों को पाठशाला में होना चाहिए था आज वो सड़क पर नजर आए.

News18 Chhattisgarh
Updated: September 15, 2018, 8:52 PM IST
स्कूल को गांव में लाने के लिए आदिवासी बच्चों का आंदोलन
आदिवासी समाज के बच्चे आश्रम की मांग को लेकर आंदोलन करते हुए
News18 Chhattisgarh
Updated: September 15, 2018, 8:52 PM IST
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले का आदिम जाति कल्याण विभाग अपनी कार्यशैली को लेकर पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में बना हुआ है.विभाग की लापरवाही के कारण चार दिन पहले कमार जनजाति के लोग अपनी 5 सूत्रीय मांगों को लेकर पदयात्रा करने पर मजबूर हुए और अब आदिवासी समाज के बच्चे आश्रम को लेकर पदयात्रा करने पर मजबूर हो रहे हैं.जिन नन्हें बच्चों को पाठशाला में होना चाहिए था आज वो सड़क पर नजर आए.उनके हाथ में पुस्तकें होनी चाहिए थी आज उनके हाथ में आंदोलन के बैनर हैं. जिनको ककहरा रटना चाहिए था आज वो जिन्दाबाद मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हैं.

अपने पालकों के साथ नारे लगाते हुए पदयात्रा में चल रहे बड़े गोबरा आश्रम के बच्चों की मांग है कि बड़े गोबरा के नाम पर शासन द्वारा भाठीगढ में चार साल से जो आश्रम संचालित हो रहा है वह उनके गांव में ही खोला जाए ताकि वह अच्छे से पढाई कर सकें. इसी मांग को लेकर वे अपने गांव से 5 किमी पैदल चलकर जिला मुख्यालय में कलेक्टर से मिलने निकले हैं.आदिवासियों का दावा है कि अपनी इस मांग को लेकर वे पिछले चार साल से लड़ाई लड रहे हैं.अधिकारी उन्हें लगातार आश्वासन दे रहे हैं. इस बार भी अधिकारियों ने अगस्त महीने तक आश्रम बड़े गोबरा में शिफ्ट करने का आश्वासन दिया था मगर वादा पूरा नहीं हुआ.

आज भी आश्रम बड़े गोबरा से पांच किमी दूर भाठीगढ़ में संचालित हो रहा है जिसका खामियाजा बड़े गोबरा के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है.सरकार एक तरफ आदिवासियों को हर संभव मदद देने का दावा कर रही है वही गरियाबंद जिला प्रशासन सरकार के दावों पर पलीता लगाने में लगी है. जिन मांगो को लेकर चार दिन पहले कमार जनजाति के लोग 100 किमी की पदयात्रा पर निकले और जिस मांग को लेकर आज ये बच्चे 50 किमी की पदयात्रा करने मजबूर हो रहे है, ये सारी मांगे सरकार पहले ही पूरी कर चुकी है मगर जिले के आदिम जाति कल्याण विभाग की लेटलतीफी के कारण इनका क्रियान्वयन अब तक अधूरा है.
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