सुपेबेड़ा में किडनी की बीमारी से एक और मौत, अब तक 64

सुपेबेड़ा में ढाई साल से एक एक कर किडनी मरीजों की मौत हो रही है. प्रशासन केवल पुख्ता इंतजाम कर दावा कर रहा है.

Krishna Kumar Saini | News18 Chhattisgarh
Updated: June 13, 2018, 11:43 AM IST
सुपेबेड़ा में किडनी की बीमारी से एक और मौत, अब तक 64
प्रतीकात्मक तस्वीर
Krishna Kumar Saini
Krishna Kumar Saini | News18 Chhattisgarh
Updated: June 13, 2018, 11:43 AM IST
गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा में किडनी मरीजों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. सुपेबेड़ा में ढाई साल से एक-एक कर किडनी मरीजों की मौत हो रही है. अब मौत का ये आंकड़ा बढ़कर 64 हो गया है. प्रशासन गांव में व्यवस्थाओं के पुख्ता करने का दवा करता आ रहा है, मगर हर मौत के बाद व्यवस्थाओं के दावों की पोल खुलकर सामने आ रही है.

बता दें की राजधानी रायपुर से 250 किमी दूर गरियाबंद जिले के अंतिम छोर में बसे है गांव सुपेबेड़ा. किडनी की बीमारी अब इस गांव की पहचान बन गई है. किडनी की बीमारी से अब तक गांव में 64 मौत हो चुकी है और 200 से ज्यादा लोग अभी भी इस बीमारी से पीड़ित है.



सुपेबेड़ा में बुधवार को फिर एक महिला की मौत हो गई. महिला काफी लंबे समय से बीमार थी. ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि अगर प्रशासन सही समय पर ध्यान देता और महिला को समय पर इलाज मिलता को महिला की जान बचाई जा सकती थी.

अब तक की रिपोर्ट में दुषित पानी को किडनी की बीमारी का कारण बताया गया है. जिला प्रशासन ने दावा किया है कि सुपेबेड़ा में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कर दी गई है लेकिन जिला प्रशासन के दावे केवल कागजों तक ही सीमित है.



जमीनी हकीकत ये है कि आज भी सुपेबेड़ा के लोग दुषित पानी पीने पर मजबूर है. सुपेबेड़ा के हालात इतने गंभीर हो गए है कि गांव में 15 दिन में एक नया मरीज सामने आ रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि शासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है. परेशान ग्रामीणों ने प्रदेश से अलग होने तक की मांग शासन से की थी

दिल्ली और रायपुर के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने गांव पहुंचकर बेहतर इलाज का भरोसा दिलाया. रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में सुपेबेड़ा के नाम से 5 बिस्तर का एक अलग विभाग भी बनाया. लेकिन मेकाहारा में भी ग्रामीणों को सही इलाज नहीं मिला. हालात ये है कि लोग अब इलाज के लिए मेकाहारा जाना ही नहीं चाहते.

शासन दो साल बाद भी सुपेबेड़ा में फैसली इस बीमारी के सही कारणों का पता लगाने में नाकाम साबित हुआ है. यही नहीं शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध मुहैया कराने में भी शासन फिसड्डी साबित हुआ है.
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