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सुपेबेड़ा की किडनी बीमारी के समाधान के लिए अब आंध्र प्रदेश का सहारा, सरकार ने बनाया ये प्लान

Krishna Kumar Saini | News18 Chhattisgarh
Updated: February 8, 2020, 10:26 AM IST
सुपेबेड़ा की किडनी बीमारी के समाधान के लिए अब आंध्र प्रदेश का सहारा, सरकार ने बनाया ये प्लान
गरियाबंद की सुपेबेड़ा के किडनी बीमारी के रोकथान के लिए एक नया प्लान तैयार किया है.

आंध्र प्रदेश सरकार इसके लिए छत्तीसगढ़ से गए दल की मदद करेगा. दल तीन दिन यहां रुककर हालात को समझने की कौशिश करेगा.

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गरियाबंद. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के गरियाबंद (Gariyabandh) जिले के सुपेबेड़ा (Supebeda Kidnay Disease) गांव में लाइलाज बन चुकी किडनी की बीमारी के समाधान के लिए अब प्रदेश सरकार ने आंध्र प्रदेश सरकार से मदद ली है. सुपेबेड़ा के 12 किडनी प्रभावितों और 8 स्वास्थ्य विभाग (Health Department) के कर्मचारियों का एक दल आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh ) के श्रीकाकुलम जिले के उदायन गांव के लिए रवाना हो चुका है. यह गांव भी किडनी की बीमारी से जुझ रहा है और सुपेबेड़ा की तरह यहां भी अब तक बीमारी के कारणों का पता नहीं चल पाया है. दल यहां पहुंचकर दोनों गांव में फैली बीमारी के कारणों का पता लगाएगा. आंध्र प्रदेश सरकार इसके लिए छत्तीसगढ़ से गए दल की मदद करेगा. दल तीन दिन यहां रुककर हालात को समझने की कौशिश करेगा.

दल भेजने का कारण

सीएमएचओ एनआर नवरतने और दल के साथ गए देवभोग बीएमओ सुनील भारती ने बताया कि दोनों गांव किडनी की बीमारी से जुझ रहे हैं. लगातार हो रही मौत और बढ़ते मरीजों के बाद दोनों गांव के लोग बहुत परेशान हैं. कुछ दिन पहले सुपेबेड़ा के दौरे पर आई दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की टीम ने स्वास्थ्य विभाग को आंध्रप्रदेश के उदायन गांव का दौरा करने की सलाह दी थी. विभाग का दावा है कि दोनों गांव के लोग जब आपस में बातचीत करेंगे तो कई तरह की जानकारियां सामने आएंगी.

क्या है सुपेबेड़ा के हालात

सुपेबेड़ा में बीते तीन साल से किडनी की बीमारी के कारण लगातार मौत हो रही है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मौत का आंकडा 71 पार हो चुका है. मरीजों की संख्या 200 से ज्यादा हो गई है जो लगातार बढ़ रही है. केन्द्र और राज्य सरकार के निर्देश पर अब तक कई टीम गांव का दौरा कर चुकी है. दिल्ली एम्स की टीम भी दो बार यहां आ चुकी है. कृषि और भूविज्ञानिकों की टीम भी गांव का दौरा कर चुकी है मगर इसके बावजूद भी बीमारी के कारणों का पता नहीं लगाया जा सका है.

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सुपेबेड़ा के 12 किडनी प्रभावितों और 8 स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का एक दल आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के उदायन गांव के लिए रवाना हो चुका है.


गांव बना राजनीति का अखाड़ासुपेबेड़ा बीते तीन साल से राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है. भाजपा, कांग्रेस हो या फिर जोगी कांग्रेस किसी भी पार्टी ने इस गांव के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने में कभी मौका नहीं गंवाया. जब कांग्रेस विपक्ष में थी तब भाजपा पर बीमारी को लेकर उदासीन होने का आरोप लगाती थी और अब वही आरोप भाजपा कांग्रेस पर लगा रही है. जोगी कांग्रेस भी इस मामले में कभी पीछे नहीं रही. डॉ. रमन सिंह से लेकर भूपेश बघेल तक और अजय चंद्रकार से लेकर टीएस सिंहदेव तक यहां का दौरा कर चुके हैं. सभी ने इलाज और बीमारी की रोकथाम के लिए बड़े दावे तो किए मगर जमीनी हकीकत में हालात जस के तस बने रहे. आज भी ग्रामीण इलाज और बीमारी से छुटकारा पाने के लिए तरस रहे हैं.

कुछ दिन पहले सुपेबेड़ा के दौरे पर आई दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की टीम ने स्वास्थ्य विभाग को आंध्रप्रदेश के उदायन गांव का दौरा करने की सलाह दी थी.


 

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First published: February 8, 2020, 10:20 AM IST
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