बच्चों को स्कूली शिक्षा के साथ व्यावहारिक ज्ञान भी हो, पालकों को दी गई जिम्मेदारी

बच्चों को स्कूली शिक्षा के साथ व्यावहारिक ज्ञान भी हो, पालकों को दी गई जिम्मेदारी

शिक्षिकों के साथ पालक और समाज के लोग भी बच्चों की बेहतरी के लिए अपनी जिम्मेदारी को समझे इसलिए स्कूल में उपस्थित सभी को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराया गया. वहीं माता उन्मुखी कार्यक्रम आयोजित कर माताओं को बच्चों के बेहतर लालन पालन की जानकारी दी गई.

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छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी परिवार और समाज का साथ है. परिवार और समाज में रहकर बच्चे कई शिक्षा अपने आप ही ग्रहण कर लेते हैं. अगर बच्चों के भविष्य के लिए शिक्षक, पालक और समाज एक साथ मिलकर पहल करे तो परिणाम सकारात्मक ही आएंगे. दरअसल, उज्जवल भविष्य की राह ताकते ये बच्चे गरियाबंद जिले के धुरसा प्राथमिक शाला के हैं. शाला में बच्चों के अलावा कुछ ग्रामीण भी हैं, जिनमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं. इनमें से कोई बच्चों के पालक हैं तो कोई समाजसेवी.

शाला में ये सभी इसलिए एकत्रित हुए हैं ताकि गांव के बच्चों के भविष्या को लेकर कोई योजना बनाई जा सके. साथ ही शिक्षिकों के साथ पालक और समाज के लोग भी बच्चों की बेहतरी के लिए अपनी जिम्मेदारी को समझे और निभाए. इस दौरान स्कूल में उपस्थित सभी को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराया गया. माता उन्मुखी कार्यक्रम आयोजित कर माताओं को बच्चों के बेहतर लालन पालन की जानकारी दी गई. समाज के लोगों ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाई.

इस दौरान एक समाजसेवी ने बच्चों को कंप्यूटर भी भेंट किया, ताकि बच्चे ज्ञान अर्जित कर सके. पिछले साल शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षक ईश्वरी सिन्हा वैसे तो फिलहाल बालौद जिले में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन वे इसी गांव के निवासी हैं और यहीं से उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की है.

वहीं गांव के स्कूल में पदस्थ शिक्षकों ने भी ईश्वरी सिन्हा की तरह कार्य करने और जिम्मेदारी निभाने का भरोसा दिलाया है. वैसे तो शिक्षा का मंदिर स्कूल को कहा जाता है, लेकिन सामाजिक प्राणी होने के नाते इंसान को अपने परिवार और समाज से भी कई प्रकार के व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होते हैं, जो जीवन में उतने ही जरूरी हैं, जितने स्कूल से अर्जित की गई शिक्षा है. ऐसे में बच्चों को बेहतर इंसान बनाने के लिए स्कूली शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक शिक्षा मिलना भी बहुत जरूरी हो जाता है. ये तभी संभव है जब परिवार और समाज भी एक शिक्षक की तरह अपनी जिम्मेदारी निभाए.

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