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बड़ा भ्रष्टाचार, 36 लाख खर्च कर भी जिला पंचायत नहीं बचा सका 12 हजार पौधे

बड़ा भ्रष्टाचार, 36 लाख खर्च कर भी जिला पंचायत नहीं बचा सका 12 हजार पौधे

बड़ा भ्रष्टाचार, 36 लाख खर्च कर भी जिला पंचायत नहीं बचा सका 12 हजार पौधे

जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों ने नियम-कानून सब ताक पर रखकर परियोजना तैयार किया, फिर उसमें जमकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया.

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छत्तीसगढ़ में गरियाबंद जिला पंचायत का एक बड़ा कारनामा सामने आया है. जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों ने नियम-कानून सब ताक पर रखकर परियोजना तैयार किया, फिर उसमें जमकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया. बता दें कि करीब 36 लाख की खाद डालने का दावा करने के बाद भी अधिकारी 12 हजार पौधों को नहीं बचा सके. इस तरह उनकी पूरी परियोजना फेल हो गई.

घेरा की गई बिरीघाट पंचायत की 48 एकड़ शासकीय भूमि पर 6 महीने पहले जिला पंचायत ने एप्पल बेर उगाने की योजना बनाई थी. इसके लिए 1 करोड़ 33 लाख रुपए सेंक्शन किए गए. ग्राम पंचायत को क्रियान्वयन एजेंसी बनाया गया. इतना ही नहीं भूमि की घेराबंदी करने के बाद उसमें कुल 12 हजार पौधे भी रोपे गए, जिसमें खाद और मिट्टी के नाम पर 36 लाख रुपए खर्च किए गए.

बता दें कि अब तक इस परियोजना पर 36 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद भी कहीं कोई हरा-भरा पौधा नजर नहीं आ रहा है. इसमें सबसे अहम बात यह है कि क्रियान्वयन एजेंसी ग्राम पंचायत होने के बाद भी राशि का खर्च डायरेक्ट जिला पंचायत द्वारा कर दिया.



अब जरा ये भी समझ लीजिए की इस पूरे मामले में क्या-क्या हुआ और नियम कानूनों को ताक पर रखकर अधिकारियों ने कैसे इतने बड़े भ्रष्टाचार को अंजाम दिया:-
1. ग्राम पंचायत को क्रियान्वयन एजेंसी बनाया गया, जबकि नियमानुसार ग्राम पंचायत को 20 लाख से अधिक का काम अपने स्तर पर कराने का पावर नहीं है.

2. परियोजना में पानी के लिए बजट की कोई व्यवस्था नहीं की गई. अधिकारियों ने खानापूर्ति कर आसपास के तीन किसानों के नाम पर सौर ऊर्जा चलित पंप सेंक्शन करवाकर नियम के विरुद्ध प्लांट में लगवा दिए.

3. इस तरह के पौधे उगाने के लिए जिले में उद्यानिकी विभाग मौजूद है, जिसके पास इस तरह की पूरी टेक्निकल जानकारी होती है, लेकिन यहां जिला पंचायत ने ग्राम पंचायत को एजेंसी बनाकर सारा काम खुद अपने चेहतो से करवा लिया.

बहरहाल, 6 महीने पहले जब ये पूरा खेल चल रहा था उस समय जो जिम्मेदार अधिकारी मौजूद थे, वे इस पूरे मामले से अब अनभिज्ञता जाहिर कर रहे हैं. तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ का तबादला हो गया और वर्तमान सीईओ फाइल देखने के बाद ही कुछ कहने की बात कह रहे हैं. हालांकि सीईओ पीआर खुंटे ने जांच टीम गठित कर जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया है.

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