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सुपेबेड़ा मामले में मानवाधिकार आयोग ने केंद्र और राज्य सरकार को भेजा नोटिस

सुपेबेड़ा मामले में मानवाधिकार आयोग ने केंद्र और राज्य सरकार को भेजा नोटिस

सुपेबेड़ा में 200 से ज्यादा ग्रामीण अब भी किडनी की बीमारी से ग्रसित

सुपेबेड़ा में 200 से ज्यादा ग्रामीण अब भी किडनी की बीमारी से ग्रसित

गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा मामले में मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है.

    छत्तीसगढ़ में गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा मामले में मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार से 4 हफ्ते में जवाब तलब किया है. मालूम हो कि किडनी की बीमारी से प्रभावित सुपेबेड़ा में अब तक करीब 58 लोगों की मौत हो चुकी है. साथ ही 200 से ज्यादा ग्रामीण अभी भी किडनी की बीमारी से ग्रसित हैं.

    वहीं गांव में किडनी की बीमारी से हो रही मौत का सिलसिला पिछले 5 साल से जारी है. बावजूद इसके राज्य सरकार इस बीमारी के रोकथाम के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं कर पाई है. अब यह मामला मानवाधिकार आयोग द्वारा संज्ञान में लेने के बाद सुपेबेड़ा के लोगों को एक बार फिर बेहतर इलाज की उम्मीद जगी है.

    ग्रामीणों ने बताया कि मानवाधिकार आयोग से उन्हें बहुत सी उम्मीदें हैं. हालांकि ऐसी ही उम्मीद छत्तीसगढ़ कांग्रेस और छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जोगी) पार्टी के स्थानीय नेताओं ने भी जताई है. इस दौरान उन्होंने मानवाधिकार आयोग पर मामले को देर से संज्ञान लेने का आरोप भी लगाया है.

    कांग्रेस नेता जनक ध्रुव का कहना है कि अगर मानवाधिकार आयोग ने सालभर पहले मामले को संज्ञान में ले लिया होता तो शायद आज मौत का आंकड़ा इतना बढ़ता. साथ ही आज सुपेबेड़ा गांव की हालत इतनी बदतर नहीं होती.

    वहीं छजकां नेता मनोज मिश्रा ने कहा कि सुपेबेड़ा मामले में मानवाधिकार आयोग ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस भेजकर बहुत अच्छा कदम उठाया है. हालांकि ये कदम मानवाधिकार आयोग को दो साल पहले ही यह उठा लेना चाहिए था, लेकिन देर आए दुरुस्त आए.

    Tags: Human Rights Commission, Kidney disease

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