किडनी की बीमारी से त्रस्त सुपेबेड़ा का होगा निरीक्षण, कोर्ट ने 4 हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने कहा

न्यायमित्र ओटवानी अब सुपेबेड़ा का निरीक्षण कर 4 सप्ताह में वहां के स्थिति से हाईकोर्ट को अवगत कराएंगे.

Pankaj Gupte | News18 Chhattisgarh
Updated: July 18, 2019, 9:56 AM IST
किडनी की बीमारी से त्रस्त सुपेबेड़ा का होगा निरीक्षण, कोर्ट ने 4 हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने कहा
गांव में अस्पताल नहीं होने की वजह से मरीजों को रायपुर या ओडिशा के भवानिपट्टनम्म जाना पड़ता है.
Pankaj Gupte
Pankaj Gupte | News18 Chhattisgarh
Updated: July 18, 2019, 9:56 AM IST
गरियाबंद जिले के देवभोग के सुपेबेड़ा में गंदे पानी से हुए कई मौत और ग्रसित हुए लोगों के मामले में कोर्ट के संज्ञान से जनहित याचिका में सुनवाई हुई. मालूम हो कि पिछले सुनवाई के दौरान न्यायमित्र ने ग्राउंड रिपोर्ट प्रस्तुत कर कहा था कि सुपेबेड़ा से लगे 13 किलोमीटर की दूरी में स्थित ओडिशा के तेलनदी से यहां पानी लाया जा सकता है. न्यायमित्र की रिपोर्ट पर कोर्ट ने कहा था राज्य सरकार 3 दिन के भीतर नोडल अधिकारी नियुक्त करें. साथ ही नोडल अधिकारी को अन्य संबंधित विभागों से समन्वय कर समस्या का समाधान करने कोर्ट ने निर्देश दिया था.

कोर्ट ने दिया ये निर्देश

बुधवार को मामले की सुनवाई के बाद शासन ने हाईकोर्ट में जवाब प्रस्तुत कर कहा कि नोडल अधिकारी की नियुक्ति कर दी गई है. इस पर न्यायमित्र सुनील ओटवानी ने कोर्ट से आग्रह कर कहा कि वे सुपेबेड़ा जाकर एक बार और निरीक्षण करना चाहते है. न्यायमित्र ओटवानी अब सुपेबेड़ा का निरीक्षण कर 4 सप्ताह में वहां के स्थिति से हाईकोर्ट को अवगत कराएंगे.

बता दें कि गरियाबंद जिले के देवभोग स्थित सुपेबेड़ा जनपद में गंदा पानी पीने के कारण कई लोगों का किडनी फेल हो गई थी. इस कारण कई लोगों ने अपनी जान गवा दी. फिर इस मामले को लेकर स्थानीय निवासी ने हाईकोर्ट को एक पत्र लिखा था. उस पत्र को हाईकोर्ट चीफ जस्टिस ने संज्ञान में लेकर न्यायमित्र का गठन किया था.

मामले में स्टेट लीगल अथॉरिटी सर्विसेज की टीम ने सुपेबेड़ा में जाकर निरीक्षण कर कोर्ट को जवाब प्रस्तुत किया था. इसमे बताया गया था कि गांव के भूजल में भारी धातुओं के साथ फ्लोराइड की मात्रा अधिक हो गई थी. इस पानी को पीने से ग्रामीणों का किडनी फेल हो रहा है. गांव में अस्पताल नहीं होने की वजह से मरीजों को रायपुर या ओडिशा के भवानिपट्टनम्म जाना पड़ता है. इस सुनवाई में कोर्ट में ये भी कहा गया कि वहां डायलिसिस मशीन तो लगा दिया गया है पर अब तक एक भी डायलिसिस नहीं किया गया है.

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First published: July 18, 2019, 9:56 AM IST
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