वाजिब दाम न मिलने पर दुग्ध उत्पादकों ने नाले में बहाया दूध

वाजिब दाम न मिलने पर दुग्ध उत्पादकों ने नाले में बहाया दूध

वाजिब दाम न मिलने पर दुग्ध उत्पादकों ने नाले में बहाया दूध

किसानों का आरोप है कि वे ठेकेदार को सही दूध बेचते हैं, लेकिन ठेकेदार अपनी मनमर्जी चलाते हुए किसी भी दिन उनसे खरीदे हुए दूध को एक दिन बाद गुणवत्ताविहीन बताकर वापस लौटा देता है.

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छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में दुग्ध उत्पादक किसान इन दिनों घाटे में चल रहे हैं. यही वजह है कि वे नाले में सारा दुध बहाने को मजबूर हो गए हैं. दरअसल, किसान दूध नहीं बिकने और उसका वाजीब दाम नहीं मिलने से काफी खफा हैं. अब इन किसानों के पास दूध नाले में बहाने के सिवाय दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा है. हालांकि ये कोई पहला मौका नहीं है जब गरियाबंद के दुग्ध उत्पादक किसानों ने दूध पानी में बहाया हो. बता दें कि इससे पहले किसानों ने 6 माह में दो बार दूध को पानी में बहाकर अपनी नाराजगी जता चुके हैं. जिले के हजारों दुग्ध उत्पादक किसान पिछले कई महीने से घाटे में चल रहे हैं.

किसानों की मानें तो वे देवभोग दूध नाम की एक अर्धशासकीय कंपनी को ठेकेदार के माध्यम से दूध बेचते हैं. ठेकेदार अपना मुनाफा कमाने के लिए उनसे अपनी नियम शर्तों पर दूध की खरीदी करता है. किसानों का आरोप है कि वे ठेकेदार को सही दूध बेचते हैं, लेकिन ठेकेदार अपनी मनमर्जी चलाते हुए किसी भी दिन उनसे खरीदे हुए दूध को एक दिन बाद गुणवत्ताविहीन बताकर वापस लौटा देता है. इससे उनको भारी नुकसान उठाना पड़ता है. किसानों ने समस्या से निपटने के लिए दुग्ध कंपनी के अधिकारियों से बात करने की कोशिश भी की, लेकिन कंपनी के अधिकारियों ने उनकी बातों को कोई तवज्जो नहीं दिया. उलटा ठेकेदार भी इस मामले में किसानों को ही गलत ठहराने की कोशिश कर रहा है.

बहरहाल, जब प्रदेश में 20 रुपए लीटर पानी की बोतलें बिक रहीं हो और किसानों को अपना दूध 22 रुपए प्रति लीटर में बेचना पड़ रहा हो, तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसानों को कितना नुकसान झेलना पड़ रहा होगा. ऐसे में सरकार ने आगामी साल 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का दावा किया, जो अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा कर रही है.



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