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गरियाबंद में आर्थिक तंगी से जूझ रहा मनरेगा, अस्थाई कर्मचारियों को हटाने का फैसला

Krishna Kumar Saini | News18 Chhattisgarh
Updated: December 11, 2019, 9:13 AM IST
गरियाबंद में आर्थिक तंगी से जूझ रहा मनरेगा, अस्थाई कर्मचारियों को हटाने का फैसला
देवभेग में निकाले गए 15 अस्थाई डाटा एंट्री ऑपरेटर

गरियाबंद (Gariyaband) जिले में लोगों के रोजगार (Employment) का एकमात्र जरिया मनरेगा (MNREGA) अब खुद ही आर्थिक तंगी (Financial Crisis) से जूझ रहा है.

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गरियाबंद. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के गरियाबंद (Gariyaband) जिले में लोगों के रोजगार (Employment) का एकमात्र जरिया मनरेगा (MNREGA) अब खुद ही आर्थिक तंगी (Financial Crisis) से जूझ रहा है. ऐसे में विभाग की आर्थिक तंगी का असर अब वहां काम करने वाले कर्मचारियों (Workers) पर दिखने लगा है. लिहाजा, विभाग ने वर्षों से काम कर रहे अस्थाई कर्मचारियों (Temporary workers) को हटाने का फैसला लिया है.

देवभेग में निकाले गए 15 अस्थाई डाटा एंट्री ऑपरेटर

बता दें कि अकेले देवभोग (Deobhog) में मनरेगा कार्यालय से 15 अस्थाई डाटा एंट्री ऑपरेटरों को निकाल दिया गया है. पूरे जिले की अगर बात की जाए तो 50 से ज्यादा अस्थाई डाटा एंट्री ऑपरेटरों को काम नहीं होने का हवाला देकर नौकरी से निकाल दिया गया है.

वहीं जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले में कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं. ऐसे में नौकरी से निकाले गए युवाओं के सामने एक बार फिर से रोजगार का संकट खड़ा हो गया है. ये युवा पिछले 10 साल से विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे थे और अब इन्हें अचानक निकाल दिया गया है.

मनरेगा के काम पड़े ठप

गरियाबंद जिले में मनरेगा कार्यों की बात की जाए तो फिलहाल मनरेगा के काम बिलकुल ठप पड़ गए हैं. गिनी चुनी पंचायतों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश पंचायतों में मनरेगा का कोई काम संचालित नहीं हो रहा है.

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First published: December 11, 2019, 9:13 AM IST
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