देवभोग विकासखंड में 154 में से 74 हैंडपंप के पानी पीने लायक नहीं

गरियाबंद में 217 प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में लगे 154 हैंडपंप की जांच कर शिक्षा विभाग को जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें 74 हैंडपंप के पानी पीने लायक नहीं हैं.

Krishna Kumar Saini | News18 Chhattisgarh
Updated: August 12, 2018, 12:01 PM IST
देवभोग विकासखंड में 154 में से 74 हैंडपंप के पानी पीने लायक नहीं
देवभोग विकासखंड में 154 में से 74 हैंडपंप के पानी पीने लायक नहीं
Krishna Kumar Saini | News18 Chhattisgarh
Updated: August 12, 2018, 12:01 PM IST
छत्तीसगढ़ में गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा और गोहेकेला के अलावा उस इलाके के कई गांवों में लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं. गांवों में लगे किसी भी हैंडपंप का पानी पीने लायक नहीं है. पीएचई विभाग की जांच में ये बड़ा खुलासा हुआ है. जिले के पीएचई विभाग ने देवभोग विकासखंड के स्कूलों में लगे हैंडपंप के पानी की जांच की, तो चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई. विभाग ने विकासखंड के 217 प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में लगे 154 हैंडपंप की जांच कर शिक्षा विभाग को जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें 74 हैंडपंप के पानी पीने लायक नहीं हैं.

दरअसल, इन हैंडपंप से निकलने वाले पानी में फ्लोराइड और आयरन की मात्रा कई गुणा ज्यादा पाई गई है. विभाग ने इस पानी को पीने योग्य नहीं होने की बात कहकर तत्काल इस पर रोक लगा दी है. हालांकि  कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण करीब 3800 स्कूली बच्चे अभी भी इन्हीं हैंडपंप के पानी पीने को मजबूर हैं.

पीएचई विभाग ने जिन हैंडपंप के पानी सही नहीं पाए हैं, उन पर लाल चिन्ह लगा दिया है. विभाग ने इन हैंडपंप की रिपोर्ट महीने भर पहले शिक्षा विभाग को सौंपकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है, अब शिक्षा विभाग स्कूलों में पेयजल व्यवस्था के लिए कोई फंड नहीं होने का हवाला देकर इस समस्या से निपटने में खुद को लाचार बता रहा है.

वहीं जिला शिक्षा अधिकारी एस. एल. ओगरे ने उच्चाधिकारियों से राय मशवरा कर इस समस्या के समाधान का आश्वसन दिया है. साथ ही कहा कि स्कूलों में पेयजल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पीएचई विभाग की है.

बहरहाल, दोनों ही विभाग एक-दूसरे की जिम्मेदारी बताकर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने से हाथ खींचते नजर आ रहे हैं. वहीं अधिकारियों की इस लापरवाही का खामियाजा स्कूल के बच्चों और ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है. ऐसे में समय रहते अगर स्कूलों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई तो फिर प्रशासन के लिए हालात सुधार पाना मुश्किल हो जाएगा.
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