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गरियाबंद में खुली सरकारी दावों की पोल, स्कूल तो दूर सड़क तक नसीब नहीं

गरियाबंद जिले में शिक्षा व्यवस्था के हालात ठीक नहीं हैं. कहीं शिक्षकों की कमी है तो कहीं बच्चों को जर्जर भवन में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है.

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छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में शिक्षा व्यवस्था के हालात ठीक नहीं हैं. कहीं शिक्षकों की कमी है तो कहीं बच्चों को जर्जर भवन में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है. आलम यह है कि कुछ स्कूलों में पहुंचने तक के रास्ते नहीं हैं. ताजा मामला देवभोग अनुविभाग के उरमाल हाई स्कूल का है. सरकार ने हाई स्कूल को हायर सेकेंडरी स्कूल में अपग्रेड तो कर दिया, लेकिन स्कूल के लिए भवन बनाना भूल गई.

फिलहाल, हायर सेकेंडरी स्कूल अभी हाई स्कूल भवन में ही संचालित हो रहा है. हालांकि इस भवन की भी हालत जर्जर है, जो कभी भी किसी बड़े हादसे को बुलावा दे सकती है. ऐसे में यहां पढ़ने आने वाले बच्चे डर के साए में पढ़ाई कर रहे हैं. वैसे तो हर गांव में स्कूल खोलने और हर बच्चे को शिक्षा देने का सरकार ने दावा किया है, लेकिन गरियाबंद जिले में सरकार के ये दावे खोखले साबित होते दिखाई दे रहे हैं.

इसी अनुविभाग के जामगुरिया प्राथमिक स्कूल की हालत और भी खतरनाक है. यहां सरकार ने 15 साल पहले स्कूल तो खोल दिया, लेकिन स्कूल पहुंचने के लिए रास्ता बनाना भूल गई. यहां छोटे-छोटे बच्चे किसी तरह कीचड़ों से गुजरकर स्कूल पहुंचते हैं.

ऐसा नहीं है कि ग्रामीणों ने शासन को यहां के हालात से अवगत न कराया हो. जनदर्शन से लेकर लोक सुराज अभियान तक ग्रामीण अपनी फरियाद लगा चुके हैं. बावजूद इसके हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है.

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