• Home
  • »
  • News
  • »
  • chhattisgarh
  • »
  • छत्तीसगढ़ी विशेष : बेमेतरा के गिधवा-परसदा पक्षी विहार म अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल - भूपेश बघेल

छत्तीसगढ़ी विशेष : बेमेतरा के गिधवा-परसदा पक्षी विहार म अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल - भूपेश बघेल

-

-

पक्षी महोत्सव के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बहुत प्रभावित होइस. बघेलजी ह गिधवा-परसदा पक्षी-विहार ल अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र म स्थापित करे बर हरसंभव कदम उठाय के संकलप परगट करिस.

  • Share this:

प्रकृति के सुन्दरता काखर मन ल नइ मोहे. धरती जब सिंगार करथे तब जिनगानी तिहार (उत्सव) हो जथे. जीवन म नवा उल्लास के संचार होथे. पहाड़ तपस्वी लगथे. झरना जिनगी के गीत गाथे. चंचल नदिया अपन तट म सभ्यता, संस्कृति के उदगार बन जथे. महतारी कस जीवन के पोषण करथे. चलते रहना, बढ़ते रहना के संदेश देथे. जीव-जन्तु के नाना रंग-रूप जंगल ल प्राणवान बना के रखथे. वन के मन म उज्ज्वलता होथे. वन कभू महाभयंकर त कभू सरल सीधा लगथे. प्रकृति जब सिंगार करथे तब ओमा अत्यंत प्रभावी मोहकता आ जथे. इहां वनवासी जिनगी यानी जीवन तपस्या के बोध कराथे, जिहां जिनगी अति सरल, सहृदय, छल-बिना, साहस अउ धीरजमय (धैर्य) होथे. प्रकृति मां के गोद जेला मिलगे ओला फेर कुछु पाय-गंवाय के चिंता नइ होय. सुंदर-सुंदर खोह यात्रा अउ जिनगी के ठहराव ल बताथे. प्रकृति से बढ़ के चित्रकार कोनो नइ हो सके. प्रकृति जीवन के पाठ-पढाथे. जीवन जीना सीखाथे. प्रकृति संसार के सबले बड़े जीवन-पाठशाला होथे. जोंन इ पाठशाला म ज्ञान पाथें उ जीवन म कामयाब होथें. चिरई चुरगुन के बिना? प्रकृति सुन्ना हो जही. जैव-विविधता संकट म पर सकत हे. एखरे सेती दुनिया के रचयिता ईश्वर ह रंग-बिरंगी चिरई-चुरगुन बनइस. चिरई के भासा चिरई समझथे. चिरई प्रकृति ल सुंदर अउ गतिशील बनाथे. इंकर संरक्षण जरूरी हे. पर्यावरण-प्रदूषण के सेती चिरई (पक्षी) के जीवन खतरा म परत दिखत हे.

गिधवा-परसदा म प्रवासी पक्षी

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिला म गिधवा-परसदा क्षेत्र के बड़े-बड़े सरोवर मन म देश-विदेश के चिरई-चुरगुन मन के आश्रय स्थल हे. इहां देश दुनिया के 150 ले जादा पंछी मन हर साल नवम्बर से लेके मार्च तक रहवास करथें. इहां के प्राकृतिक वातावरण उन ल भा गे हे तभे इ पंछी मन पांच महीना इहां गुजारथें. विहार करथें. जैविक विविधता के द्रष्टि से भारत के गनती दुनिया के प्रमुख 12 देश म होथे. ओखर बाद म हमर करा अपन जैविक संपदा के प्रमाणिक जानकारी के अभाव हे. भारत के डॉ. सलीम अली बिना विवाद के भारत के महान विश्वविख्यात पक्षी विशेषज्ञ रिहिस जेला ‘बर्ड-मेन’ केहे जाय. ओखर जनम दिन 12 नवम्बर (1896) के राष्ट्रीय पक्षी-दिवस मनाय जथे. अपन जिनगी के 65 बरस पक्षी मन के अध्ययन/सर्वेक्षण म बीता दिस. उन ल चिरई के चलत-फिरत विश्वकोष कहे जाय. चिरई (पक्षी) मन के भासा समझइया ओ अद्भूत व्यक्तित्त्व के धनी रिहिस. ओला देश विदेश म खूब सम्मान मिलिस. भारत सरकार ओला पद्म भूषण ले सम्मानित करिस. मौजूदा माहौल म चिरई-चिरगुन ल बचाना बहुत जरूरी होगे हे. चिरई प्रकृति अउ मानव जीवन के महत्वपूर्ण भाग हे.

‘हमर चिरई-हमर चिन्हारी पक्षी महोत्सव’

प्रसन्नता के बात हे के छत्तीसगढ़ सरकार के धियान प्रदेश के चिरई मन डाहर घलो गिस हे. प्रसन्नता म उपर प्रकृति के बड़ किरपा हे. इहाँ जैव-विविधता हे. अनेकानेक दर्शनीय स्थल हें. प्रदेश म पहिली बार दुर्ग मंडल के अंतर्गत 31 जनवरी से 02 फरवरी 2021 तक जिला बेमेतरा के नवागढ़ विकास खंड के नगधा गाँव म ‘हमर चिरई-हमर चिन्हारी पक्षी महोत्सव’ के तीन दिवसीय आयोजन करे गिस. पक्षी महोत्सव के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बहुत प्रभावित होइस. श्री बघेलजी ह गिधवा-परसदा पक्षी-विहार ल अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र म स्थापित करे बर हर संभव कदम उठाय के संकलप परगट करिस. प्रदेश के मुखिया ह किहिस के पक्षी-विज्ञानी, प्रकृति प्रेमी अउ इहाँ अवइया सैलानी मन ल सुविधा दे बर सरकार बुता करही. प्रवासी चिरई के संरक्षण बर योजना बनाय जही. छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड ए क्षेत्र म काम म जुटही. गिधवा-परसदा, नगधा, एरमशाही क्षेत्र ह पानी वाले अउ जमीनी जैव-विविधता ले भरपूर हे. ये क्षेत्र म पक्षी मन के आहार-विहार बर करीब पांच छह किलोमीटर जगह हे. नौ छोटे-बड़े तरिया हे. पक्षी मन बर पानी म उगइया वनस्पति हें .पानी म जलीय जीव हें. पक्षी महोत्सव के आयोजन प्रदेश के सात स्थान म करे जहि. एखर बर कार्य योजना बन ही.

प्रवासी चिरई मन के बसेरा

इहाँ करे गे अध्ययन संबंधी खबर के अनुसार चिरई मन के 143 प्रजाति पाय गे हे जेमा 26 स्थानीय प्रजाति के चिरई शामिल हें. 11 विदेशी प्रजाति के प्रवासी चिरई हें अउ 106 स्थानीय आवासीय प्रजाति के पक्षी हें. पक्षी के प्रति जन-जागरूकता अउ प्रशिक्षण के व्यवस्था करे जही. इको-पर्यटन ले रोजगार के व्यवस्था होही. प्रकृति अउ पक्षी प्रेमी मन ल चिरई मन के सुंदर संसार देखे अवसर आनन्दित करही. बर्ड फेस्टिवल म कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, प.बंगाल, उत्तरप्रदेश, राजस्थान के पक्षी विज्ञानिक अउ पक्षी-प्रेमी मन आइन. अनेक वक्ता मन अलग-अलग विषय ले जुड़े पक्षी के गुण अउ फायदा के संबंध म जानकारी दिन. महोत्सव म प्रदेश के वन एवं परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर, मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, आई. जी.विवेकानंद सिन्हा अउ बहुत झन शामिल होइंन .महोत्सव म चित्रकला, फोटो प्रदर्शनी, रंगोली, मैराथन अउ सांस्कृतिक कार्यक्रम घलो होइस.

छत्तीसगढ़ के राजकीय पक्षी मैना

छत्तीसगढ़ म वन्य-जीवन म पक्षी बड़ सुहावन हे. इहाँ के राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना आय. कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान म पहाड़ी मैना ल संरक्षित करे गे हे. प्राकृतिक संपदा के दृष्टि से बस्तर अनमोल धरोहर हे. दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव मैना के संरक्षित क्षेत्र आय. सरकार ल पहाड़ी मैना के संख्या बढाय बर धियान देना चाही. प्रदेश म अइसे अनेक जघा हे जिहां पक्षी संरक्षन जरूरी हे.
(लेखक साहित्यकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं.)

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज