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बिहार की जेल से सरकारी अफसरों से रायपुर में वसूली, प्रशासन के उड़े होश

बिहार की जेल से सरकारी अफसरों से रायपुर में वसूली, प्रशासन के उड़े होश

वैसे तो जेल में बंद कैदियों पर बॉलीवुड ने कई फिल्में बना ली है, लेकिन जेल में रहकर सरकारी अधिकारियों से वसूली करने की बात शायद ही आपने कहीं सुनी हो। हालांकि, रायपुर पुलिस ने जो खुलासा किया है उससे जरूर बॉलीवुड फिल्म मेकर को नया मसाला मिल जाएगा।

वैसे तो जेल में बंद कैदियों पर बॉलीवुड ने कई फिल्में बना ली है, लेकिन जेल में रहकर सरकारी अधिकारियों से वसूली करने की बात शायद ही आपने कहीं सुनी हो। हालांकि, रायपुर पुलिस ने जो खुलासा किया है उससे जरूर बॉलीवुड फिल्म मेकर को नया मसाला मिल जाएगा।

वैसे तो जेल में बंद कैदियों पर बॉलीवुड ने कई फिल्में बना ली है, लेकिन जेल में रहकर सरकारी अधिकारियों से वसूली करने की बात शायद ही आपने कहीं सुनी हो। हालांकि, रायपुर पुलिस ने जो खुलासा किया है उससे जरूर बॉलीवुड फिल्म मेकर को नया मसाला मिल जाएगा।

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  • News18
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वैसे तो जेल में बंद कैदियों पर बॉलीवुड ने कई फिल्में बना ली है, लेकिन जेल में रहकर सरकारी अधिकारियों से वसूली करने की बात शायद ही आपने कहीं सुनी हो। हालांकि, रायपुर पुलिस ने जो खुलासा किया है उससे जरूर बॉलीवुड फिल्म मेकर को नया मसाला मिल जाएगा।

पिछले कई महीनों से बिहार की जेल में बंद रंजन कुमार मिश्रा रायपुर के सरकारी महकमों में पदस्थ अधिकारियों को फोन पर शक्तिशाली आईएस अधिकारियों को नाम पर लगातार धमकी देकर फोन रिचार्ज करवा रहा था, तो कभी बैंक एकाउंट में पैसे डलवा रहा था।

ये फोन एसीएस एन बैजेंद्र कुमार, खनिकर्म संचालक अंबलगन पी, प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन विभाग आरपी मंडल और अन्य अधिकारियों के नाम किया जा रहा था। फरवरी-मार्च के दौरान इस शातिर ठग कैदी ने सरकारी अधिकारियों से करीब पांच हजार का मोबाइल रिचार्ज के साथ लाखों रुपए अपने बैंक में डलवाने के लिए दबाव डाला।

एफआईआर के बाद हरकत में आई रायपुर पुलिस ने जब जांच की तो सबके होश उड़ गए। आईजी जीपी सिंह का कहना था कि आरोपी रंजन कुमार मिश्रा जो मुजफ्फरपुर खुदीराम बोस सेंट्रल जेल में लंबे समय से बंद है और इस प्रकार के फोन कॉल्स अपने स्मार्टफोन से किया करता था।

आईजी का कहना है कि चार मार्च को देवेंद्र नगर थाना में एसीएस एन बैंजेंद्र कुमार ने राखी थाना में अंबलगन पी और आरपी मंडल द्वारा शिकायत दर्ज करवाई। जिन अधिकारियों के पास इस प्रकार के फोन आए थे, उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इस बारे में सूचित किया।
हालांकि, एफआईआर होने के बाद जब मामले की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंपा तो फोन कॉल ट्रेस करने के बाद जो नतीजे सामने थे उससे सब हिल गए, क्योंकि यह कॉल मुजफ्फरपुर सेंट्रल जेल से किए गए थे।

सर्च टीम तुरंत बिहार मुजफ्फरपुर सेंट्रल जेल के लिए रवाना किया गया और जब जेल प्रबंधन से मिलकर इस बात की शिकायत की गई तो पता चला कि जेल के बैरेक में बंद कैदी रंजन कुमार मिश्रा इसको अंजाम दे रहे थे। उन्होंने बड़े सफाई से अपने बैरेक में मोबाइल फोन छुपा रखा था।

कड़ाई से जब पूछा गया तो वह टूट गया। तब पता चला के देश के विभिन्न कोने के आईएस और आईपीएस अधिकारियों के फोन नंबर उसने हासिल कर लिए थे।

उसके बाद उसी अधिकारी का नाम लेकर माताहत अधिकारियों को फोन करता था। पहले वह 5000 रुपए का रिचार्ज करवाता था, उसके बाद 2लाख रुपए अपने खाते में डलवाने के लिए दबाव डालता था। इस प्रकार का घटनाक्रम को लंबे समय से देश के विभिन्न हिस्सों में दोहरा रहा था।

आईजी जीपी सिंह का कहना है कि रंजन मिश्रार को ट्रांजिट रिमांड पर पहले 28 मार्च को रायपुर लाया जाएगा उसके बाद और खुलासे होंगे।

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