रेस्लिंग की दुनिया में छत्तीसगढ़ का पहला कदम, गांव के लड़के को ग्रेट खली ने बनाया दी लायन
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रेस्लिंग की दुनिया में छत्तीसगढ़ का पहला कदम, गांव के लड़के को ग्रेट खली ने बनाया दी लायन
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छत्तीसगढ़ के पिछड़े जिले जांजगीर-चांपा, जिसका एक छोटा सा गांव अमोरा महंत, जिसे गूगल के मानचित्र में ढूंढ पाना मुश्किल है. उस गांव को दुनिया में पहचान दिलाने के लिए प्रतीक ने रेस्लिंग की दुनिया में कदम रख दिया है.

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जोश और जूनून किसी भी मुकाम को हासिल करने का सबसे ज्यादा जरूरी अंग है. और ये जोश जूनून ही है जो एक छोटे से गांव के लड़के को वो मुकाम हासिल करा देता है. जिसका सपना तो सब देखते है लेकिन हकीकत में बिरले ही हासिल कर पाते हैं. लेकिन जांजगीर के 20 साल के प्रतीक ने रेस्लिंग की दुनिया में कदम बढ़ा दिया है.
छत्तीसगढ़ के पिछड़े जिले जांजगीर-चांपा, जिसका एक छोटा सा गांव अमोरा महंत, जिसे गूगल के मानचित्र में ढूंढ पाना मुश्किल है. उस गांव को दुनिया में पहचान दिलाने के लिए प्रतीक ने रेस्लिंग की दुनिया में कदम रख दिया है.
प्रतीक तिवारी ने फ्री स्टाइल रेसलिंग की दुनिया में नाम रौशन करने के लिए ग्रेट खली को अपना उस्ताद बनाया और उस्ताद से रेस्लिंग के गुर सीखने पंजाब के जालंधर पहुंच गये है. ग्रेट खली ने प्रतीक के जूनून को देखते हुए अमोरा के बेटे को दा लॉयन का टाइटल दिया है. प्रतीक दो साल से है. ग्रेट खली से ट्रेनिंग ले रहे है.
प्रतीक की उपलब्धि
प्रतीक ने रेस्लिंग के दुनिया में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है. प्रतीक ने अब तक पांच अंतर्राष्ट्रीय रेस्लर से भिड़ चुके है. जिसमें 3 मुकाबले में प्रतीक को जीत हासिल हुई है. प्रतीक ने इस मुकाक को हासिल करने हर दिन 3 घंटे कार्डियो , 3 घंटे जिम और तीन घंटे रिंग में रहकर अभ्यास किया है
रेस्लर बनने में प्रतीक की मुस्किलें
प्रतीक ने जब रेस्लर बनने का सपना देखा तो उसका साथ परिवार के सभी सदस्यों ने दिया. लेकिन रेस्लर के लिए सबसे जरूरी है हेल्दी डाइट के साथ अभ्यास, प्रेक्टिस में सभी का साथ मिला लेकिन जब प्रतीक को हेल्दी डाइट के लिए नॉन बेज खाने की ट्रेनर ने सलाह दी. तो पहले ब्रह्मण परिवार से होने की वजह से प्रतीक की मां मंजू तिवारी ने मना कर दिया लेकिन पिता राम गुलाम तिवारी के समझाने के बाद घर के बाहर नॉन वेज खाने की इजाजत मिल गई.


प्रतीक की डाइट
रेस्लिंग की प्रेक्टिस में शरीर को भारी मात्रा में प्रोटीन और न्यूट्रिशंस की जरूरत होती है. प्रतीक हर 40 अंडे, दो दर्जन केले और 20 मोटी रोटी, सब्जी और थोड़ी मात्रा में चावल सलाद खाते है.
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