लव मैरिज पर सामाज ने लगाया 30 हजार रुपये जुर्माना, पैसे नहीं देने पर की ये शर्मनाक हरकत
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लव मैरिज पर सामाज ने लगाया 30 हजार रुपये जुर्माना, पैसे नहीं देने पर की ये शर्मनाक हरकत
न चाहते हुए भी कई बार आपको ऐसी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जो आपकी शादी के खास अनुभव का मजा किरकिरा कर सकती हैं.

जांजगीर-चांपा (Janjgir-Champa) जिले के जैजैपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कचंदा में चौहान समाज के लोगों पर गंभीर आरोप लगे हैं.

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जांजगीर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के जांजगीर-जांपा (Janjgir-Champa) जिले में समाज के कथित ठेकेदारों द्वारा मानवता को शर्मशार करने का मामला सामने आया है. यहां अंतरजातीय प्रेम विवाह (Interracial Love Marriage) करने वाले युवक पर समाज के लोगों ने 30 हजार रुपये जुर्माना (Penalty) लगा दिया. युवक के परिवार वालों ने जब जुर्माने की ये रकम अदा नहीं की तो उनका सामाजिक बहिष्कार (Social Exclusion) कर दिया गया. इतना ही नहीं युवक के भाई की मौत (Death) के बाद उसकी अर्थी को कंधा देने से भी समाज के लोगों द्वारा इनकार कर दिया गया.

जांजगीर-चांपा (Janjgir-Champa) जिले के जैजैपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कचंदा में चौहान समाज के लोगों पर गंभीर आरोप लगे हैं. आरोप है कि अंतरजातीय विवाह करने पर अपने समाज के ही एक युवक पर 30 हजार का जुर्माना तय किया गया था. युवक द्वारा जुर्माना नहीं भर पाने पर समाज के लोगों ने युवक के बड़े भाई की अर्थी को कांधा नहीं दिया है. कचंदा में लखनलाल चौहान का पूरा परिवार रहता है. लखनलाल के दो बेटे हैं. पहला छतराम चौहान और दूसरा दिलहरण चौहान. लखनलाल का बड़ा बेटा छतराम चौहान जशपुर जिले में उद्यान विभाग में शासकीय कर्मचारी के रूप में कृषि विस्तार अधिकारी के पद पर पदस्थ था, जिसकी सड़क दुर्घटना में हाल ही में मौत हो गई.

बैठक कर निर्णय
दिलहरण चौहान ने बताया कि सड़क दुर्घटना में भाई की मौत होने के वो उसके शव को जशपुर जिले से लेकर अपने पुश्तैनी गांव कचंदा लेकर पहुंचा और उसकी मौत की सूचना अपने परिवार और समाज को दिया. छतराम की मौत की सूचना पाकर समाज के लोग एकजुट हुए और एक बैठक की. क्योंकि दिलहरण ने समाज से बाहर जाकर कुम्हार समाज की एक लड़की के साथ अंतरजातीय विवाह किया था, जो समाज के लोगों को ना गुजार था.
तत्काल जुर्माने की मांग


दिलहरण के मुताबिक शादी के बाद उसे समाज में शामिल करने के लिए जुर्माने के तौर पर 30 हजार रुपए की मांग की गई. समाज द्वारा मांगी जा रही रकम को देने के लिए वो सहमत था, लेकिन समाज के लोग वह रकम तत्काल जमा करने की बात कह रहे थे, जिस पर दिलहरण ने आपत्ति जताते हुए यह कहा कि उसके पास अभी में 5 हजार है, वह वही दे सकता है. बाकी की रकम वह अपने बड़े भाई की क्रिया कर्म के बाद दे देगा. लेकिन समाज वालों ने इस बात पर असहमति जताई और दिलहरण चन्द्रा के भाई की अर्थी को कांधा देने से मना करते हुए वापस चले गए0

दी ये दलील
क्षेत्र में चौहान समाज के मुखिया पीतर चौहान से चर्चा की गई तो उनकी अपनी अलग ही दलील सामने आई. उनका कहना है कि दिलहरण और उनका परिवार समाज के साथ नहीं रहना चाहता था तो भला समाज उनकी क्यों मदद करता. पीतर चौहान का कहना है कि किसी प्रकार की कोई जुर्माने की मांग नहीं की गई है.

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