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सरकार ने नहीं की मदद तो चंदा इकट्ठा कर किया निर्मल घाट का निर्माण

इस गांव के ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर किया निर्मल घाट का निर्माण

इस गांव के ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर किया निर्मल घाट का निर्माण

जब जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने ग्रामीणों की फरियाद नहीं सुनी, तो ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपने दमखम पर गांव के तालाब में लाखों रुपए खर्च कर निर्मल घाट का निर्माण कराया है.

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छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले में ग्रामीणों ने एकता की मिसाल पेश की है. जब जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने ग्रामीणों की फरियाद नहीं सुनी, तो ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपने दमखम पर गांव के तालाब में लाखों रुपए खर्च कर निर्मल घाट का निर्माण कराया है.

दरअसल, जिले के अकलतरा विकासखंड के ग्राम पकरिया के आश्रित ग्राम नवापारा के ग्रामीण पिछले 10 साल से जिले के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से अपने ग्राम के पुरेनहा तालाब में निर्मल घाट बनाने के लिए गुहार लगा रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.

इस दौरान 10 साल से लगातार आवेदन देने के बावजूद जब शासन-प्रशासन के जिम्मेदार ने ध्यान नहीं दिया, तो ग्रामीणों  ने एकजुट होकर गांव में एक बैठक आयोजित की. इसके बाद उस बैठक में तालाब के लिए लाखों रुपए खर्च कर निर्मल घाट के निर्माण की सहमति बनी, जिसके बाद ग्रामीणों द्वारा ये कार्य अब किया जा रहा है.

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 10 साल से वे अपने गांव के तालाब में निर्मल घाट बनाने की मांग कर रहे थे, लेकिन न तो सरपंच ने सुना और ना ही विधायक या किसी जनपद सदस्य का इस ओर कभी ध्यान गया. इसके बाद थक हारकर ग्रामीण अपनी मांग लेकर कलेक्टर के पास पहुंचे, लेकिन वहां से भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा.

इसके बाद ग्रामीणों ने गांव में ही बैठक आयोजित कर यह निर्णय लिया कि गांव के सभी लोग अपनी हैसियत के अनुसार चंदा इकट्ठा करेंगे और जो चन्दा नहीं दे पा रहा है, उनके घर से कम से कम एक व्यक्ति श्रमदान करेगा. इस तरह सबकी सहमति से निर्णय लेकर ग्रामीणों ने अपने गांव के तालाब में निर्मल घाट का निर्माण कराया.

आपको बता दें कि ग्रामीणों ने गांव के तालाब में निर्मल घाट का निर्माण करने के बाद यह संकल्प लिया है कि उनके गांव में कुछ भी जरूरत होगी, तो उसके लिए वे शासन या प्रशासन के सामने गुहार नहीं लगाएंगे. ग्रामीणों का कहना है कि वे गांव में ही एक बैठक आयोजित कर चंदा एकत्रित कर गांव की जरूरत के हिसाब से बाकी के निर्माण कार्य कराएंगे.

ग्रामीणों द्वारा निर्माण कराए जा रहे निर्मल घाट में ग्रामीणों का अब तक करीब 1 लाख 20 हजार रुपए खर्च हो चुका है. वहीं ग्रामीणों ने बाकी बचे कामों के लिए भी जल्द बैठक आयोजित कर निर्मल घाट का कार्य पूरा कराने की बात कही है.

 

बहरहाल, निश्चित तौर पर ग्रामीणों ने जिस तरह से एकता की एक मिसाल पेश की है. वह सच में तारीफ-ए-काबिल है.

 

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