यहां स्कूली बच्चे शिक्षक बन अपने साथियों को दे रहे शिक्षा की तालीम
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यहां स्कूली बच्चे शिक्षक बन अपने साथियों को दे रहे शिक्षा की तालीम
यहां स्कूली बच्चे शिक्षक बन अपने साथियों को दे रहे शिक्षा की तालीम

शासकीय प्राथमिक शाला खोकसा में 4 शिक्षक और 1 प्रधान पाठक समेत कुल 5 शिक्षकों की पदस्थापना है. इनमें से 4 शिक्षक मेडिकल अवकाश पर हैं. ऐसे में स्कूल के सीनियर बच्चों ने छोटी कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा उठाया है.

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छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले में शासकीय प्राथमिक शाला खोकसा के स्कूली बच्चे अपना भविष्य गढ़ने के लिए शिक्षक बन गए हैं. शिक्षक बन अपने साथियों को अच्छी तालीम देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. दरअसल, शासकीय प्राथमिक शाला खोकसा में शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है. शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा यहां मासूम भुगत रहे हैं. इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य भगवान भरोसे है. यह हम नहीं बल्कि यह बात इस स्कूल में पढ़ने आने वाले बच्चों के पालकों का कहना है.

बता दें कि शासकीय प्राथमिक शाला खोकसा में 4 शिक्षक और 1 प्रधान पाठक समेत कुल 5 शिक्षकों की पदस्थापना है. इनमें से 4 शिक्षक मेडिकल अवकाश पर हैं. ऐसे में बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित हो रही है. ऐसे में मात्र एक प्रधान पाठक शिव सिंह सिदार के भरोसे पहली से लेकर पांचवी तक के बच्चों की पढ़ाई टिकी हुई है. वहीं शिक्षकों के मेडिकल अवकाश पर जाने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बच्चों की पढ़ाई हानि न हो इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है. इतना ही नहीं जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बड़ी लापरवाही करते हुए शासकीय प्राथमिक शाला खोकसा के प्रधान पाठक शिव सिंह सिदार को बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की ड्यूटी में लगा दिया. इसके बाद स्कूल में कोई भी शिक्षक ही नहीं बचा, जो बच्चों की पढ़ाई पूरी करा सके.

बच्चे स्कूल तो आते हैं, लेकिन कुछ घंटे खेल कर वापस घर चले जाते हैं. वहीं स्कूल में बड़ी कक्षाओं के बच्चों के भरोसे जूनियर बच्चों की पढ़ाई हो रही है. बड़े कक्षाओं के बच्चे छोटी कक्षाओं के बच्चों को पढ़ा रहे हैं. इस मामले को लेकर के जब वहां के प्रधान पाठक से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी अपने उच्च अधिकारियों को दी थी, लेकिन कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई. इसलिए वे बच्चों को मध्यान्ह भोजन करवाने तक रुकने के बाद सीनियर बच्चों के भरोसे स्कूल छोड़कर अपनी बीएलओ की ड्यूटी करने के लिए निकल जाते हैं.



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