पत्थलगड़ी कार्यक्रम के बाद आदिवासी नेता ही एक दूसरे के आमने-सामने
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पत्थलगड़ी कार्यक्रम के बाद आदिवासी नेता ही एक दूसरे के आमने-सामने
बछरांव में हुए पत्थलगढ़ी कार्यक्रम का दृश्य

जशपुर में पत्थलगड़ी कार्यक्रम के बाद अब बड़ा विवाद शुरू हो गया है. कार्यक्रम को लेकर अब आदिवासी नेता आमने-सामने आ गए हैं. वहीं कार्यक्रम के 24 घण्टे बीत जाने के बाद भी कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने से इस कार्यक्रम का विरोध करने वाला पक्ष नाराज है.

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जशपुर में पत्थलगड़ी कार्यक्रम के बाद अब बड़ा विवाद शुरू हो गया है. कार्यक्रम को लेकर अब आदिवासी नेता ही एक दूसरे के आमने - सामने आ गए हैं. वहीं कार्यक्रम  के 24 घण्टे बीत जाने के बाद भी कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने से इस कार्यक्रम का विरोध करने वाला पक्ष नाराज है. दूसरी ओर कुछ आदिवासी नेता इस कार्यक्रम को पूरे प्रदेश में शुरू करने की तैयारी में जुट गए हैं.

बछरांव में पत्थलगढ़ी कार्यक्रम के बाद जशपुर समेत पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है. इस मामले को लेकर अब आदिवासी नेता आमने सामने आ गए हैं. पत्थलगढ़ी कार्यक्रम के नाम पर आदिवासी नेताओं का एक पक्ष इसे खुलेआम सामाजिक सद्भाव को खराब करने का प्रयास बता रहा है. इस पक्ष का कहना है कि आदिवासी समाज एवं अन्य वर्गों को वर्गीकरण कर खुलेआम एक दुसरे के खिलाफ भड़काया जा रहा था. इसके बावजूद कार्यक्रम स्थल पर कोई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद नहीं था.

पूर्व मंत्री एवं कद्दावर आदिवासी नेता गणेशराम भगत ने पत्थलगढी कार्यक्रम के माध्यम से बस्तर की तर्ज पर जशपुर को भी अशांत करने का एक कुत्सित प्रयास बताया है. वहीं इस मामले में प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर भी जमकर नाराजगी जताई है. वहीं अन्य आदिवासी नेता इस पत्थलगड़ी कार्यक्रम को पूरे छत्तीसगढ़ में शुरू करने की बात कह रहे हैं. इस कार्यक्रम के रूपरेखा तैयार करने के लिए 29 अप्रैल को अम्बिकापुर में विशाल सभा का भी आयोजन किया गया है.



 
 

 
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